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बोलो वन्दे मातरम!

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इस स्वतंत्र देश के, गणतंत्र  दिवस पर,

जनगण परतंत्र पर, बोलो वन्दे मातरम/

 .

महंगाई कि मार से, गरीबों  के शोर पर,

मुखिया के मौन पर, बोलो वन्दे मातरम/

 .

कालाधन विदेशों में,नामो कि तकरार पर,

खामोश  सरकार पर, बोलो वन्दे मातरम/

 .

कानून की आड में,  दानवों से प्यार पर,

हरदिन बलात्कार पर, बोलो वन्दे मातरम/

 .

सर कटे शहीदों के, खामोश  हथियार पर,

निर्लज्ज सरकार पर, बोलो वन्दे मातरम/

हिंदुओं  के राष्ट्र में, हिंदू  आतंकवाद पर,

तुगलकी सरकार पर, बोलो वन्दे मातरम/

 .

जनता गई भाड में, रानी कि सन्तान पर,

निश्चिन्तन दरबार पर, बोलो वन्दे मातरम/

 .

बोलो  वन्दे मातरम, बोलो वन्दे मातरम/

बोलो  वन्दे मातरम, बोलो वन्दे मातरम/



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64 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Irish के द्वारा
11/07/2016

I think my world is wonderful because there are bright colorful tress with roses on them. And, i can sit down and enjoy the birds chirp their song. The reason why is because the bright wonderful sun is the thing that brightens my day and makes it a wonderful world. It will always brighten my world, and that is why it#;8217&s a wonderful world.

manoranjanthakur के द्वारा
21/02/2013

jay ho lekhni ki …. वन्दे मातरम!

Sushma Gupta के द्वारा
18/02/2013

आदरणीय अशोक जी वन्दे मातरम् , आपकी यह रचना समसामयिक परिस्थितियों में बिलकुल सटीक है, जो व्यवस्था पर पूर्णया सटीक व्यंग करती हुई ह्रदय के रोष को व्यक्त करने में पूर्ण सक्षम है… इस हेतु आपको साभार हार्दिक वधाई…

kpsinghorai के द्वारा
03/02/2013

सर कटे शहीदों के, खामोश हथियार पर, निर्लज्ज सरकार पर, बोलो वन्दे मातरम/ रक्तले जी, देश की वर्तमान दुखद हालातों को बताती रचना………सादर

Alka के द्वारा
01/02/2013

आदरणीय रक्ताले जी , वर्तमान हालात पर करार व्यंग | आप हमेशा ही कम शब्दों में बहुत कुछ कह जाते है | वन्दे मातरम |

    akraktale के द्वारा
    03/02/2013

    आदरेया अलका जी सादर आभार. इस प्रयास को सराहने के लिए.

Malik Parveen के द्वारा
01/02/2013

देश के गद्दारों पर देश को लगे डीमक पर हर पल होते दुर्व्यवहार पर भूख गरीबी और भ्रस्टाचार पर किस किस पर बोलेंगे हम वन्दे मातरम …. देश की वर्तमान परिसिथ्ती पर व्यंग करती कविता के आभार…

    akraktale के द्वारा
    03/02/2013

    आदरेया प्रवीण जी सादर, सच है देश को गर्त में ले जाते हर कदम पर दिल दुखी है. वन्दे मातरम.

sinsera के द्वारा
31/01/2013

आदरणीय अशोक जी,नमस्कार, करारे व्यंग्य के साथ चुटीली कविता…बधाई..

    akraktale के द्वारा
    03/02/2013

    आदरेया सरिता जी सादर आभार.

rajanidurgesh के द्वारा
31/01/2013

अशोकजी सादर नमस्कार बोलो बन्दे मातरम ! भारतीय भ्रष्टाचार पर, बस में होनेवाले सामूहिक बलात्कार पर, कमल हसन के ऊपर अत्याचार पर, बल्कि हर बात पर बोलो वन्देमातरम. वन्देमातरम. आपकी रचना सदैव ही उत्कृष्ट रहती है.

    akraktale के द्वारा
    03/02/2013

    आदरेया रजनी जी सादर, आप इस रचना में व्यंग के साथ छुपे आक्रोश को भी पढ़ सकीं बहुत बहुत आभार.परिस्थितियाँ निश्चित ही विषम हैं.

aman kumar के द्वारा
29/01/2013

सुनहरे भविष्य पर बोलो वन्दे मातरम! जनता गई भाड में, रानी कि सन्तान पर, निश्चिन्तन दरबार पर, बोलो वन्दे मातरम| सब यही तो बोल रहे है और २०१४ मे यही होना है |

    akraktale के द्वारा
    31/01/2013

    अमन कुमार जी सादर, बिलकुल सही है सब को अब सिर्फ २०१४ कि ही प्रतीक्षा है. वंदे मातरम.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
29/01/2013

वन्दे मातरम् तो बोल ही लें अशोक भाई न जाने कब क्या हो जाये …निर्लज्ज बेकार सरकार ….अच्छा व्यंग्य … भ्रमर ५

    akraktale के द्वारा
    31/01/2013

    आदरणीय भ्रमर साहब सादर, अवश्य ही बोलें वंदे मातरम भले सरकार कि निर्लज्जता कम ना हो हमारा मनोबल बना रहे. जय श्री राधे.

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
28/01/2013

सही समय पर सही और सार्थक प्रस्तुति के लिए हार्दिक बधाई ! मान्य भाई सादर !!

    akraktale के द्वारा
    31/01/2013

    आदरणीय आचार्य जी सादर, रचना के समय चुनाव को सराहने के लिए आपका कोटिशः आभार.

jlsingh के द्वारा
25/01/2013

और कुछ कहना नहीं और कुछ सुनना नहीं, इस स्वतंत्र देश के, गणतंत्र दिवस पर, जनगण परतंत्र पर, बोलो वन्दे मातरम/ आदरणीय महोदय, समय आने वाला है, कुछ बदलने वाला है सुनहरे भविष्य पर बोलो वन्दे मातरम!

    akraktale के द्वारा
    25/01/2013

    आदरणीय जवाहर जी भाई सादर, शुभकामनाएं. वक्त बदले जन गण का इससे बेहतर क्या है. सुन्दर प्रतिक्रया आभार. वंदे मातरम.

rekhafbd के द्वारा
24/01/2013

आदरणीय अशोक जी ,सर कटे शहीदों के, खामोश हथियार पर, निर्लज्ज सरकार पर, बोलो वन्दे मातरम/ . हिंदुओं के राष्ट्र में, हिंदू आतंकवाद पर, तुगलकी सरकार पर, बोलो वन्दे मातरम/ सार्थक रचना ,जय हिन्द .

    akraktale के द्वारा
    25/01/2013

    आदरेया रेखा जी सादर आभार. जयहिंद! वन्दे मातरम!

TUFAIL A. SIDDEQUI के द्वारा
24/01/2013

आदरणीय अशोक जी सादर अभिवादन, गणतंत्र दिवस पर बहुत ही उम्दा रचना पर हार्दिक बधाई. बहुत सारी बातों को चंद शब्दों में कह देना आपकी विशेषता है. – तुफैल ए. सिद्दीकी http://siddequi.jagranjunction.com

    akraktale के द्वारा
    25/01/2013

    आदरणीय तुफैल ए. सिद्दीकी जी सादर, रचना पसंद करने और सराहने के लिए आपका हार्दिक आभार. 

Rajesh Dubey के द्वारा
24/01/2013

रानी और राजा के पास तो चाटुकार ही रहते हैं. लेकिन वर्तमान सन्दर्भ में बोलो वन्दे मातरम बहुत ही प्रासंगिक है.

    akraktale के द्वारा
    25/01/2013

    सादर.

yogi sarswat के द्वारा
24/01/2013

सर कटे शहीदों के, खामोश हथियार पर, निर्लज्ज सरकार पर, बोलो वन्दे मातरम/ . हिंदुओं के राष्ट्र में, हिंदू आतंकवाद पर, तुगलकी सरकार पर, बोलो वन्दे मातरम/ . जनता गई भाड में, रानी कि सन्तान पर, निश्चिन्तन दरबार पर, बोलो वन्दे मातरम/ मूर्खों की सरकार पर और उनके नए नए सरदार पर बहन और जीजा के साथ पर बोलो वन्देमातरम क्या बात है आदरणीय श्री अशोक जी ! सब कुछ खोल के रख दिया ! बहुत सही

    akraktale के द्वारा
    25/01/2013

    आदरणीय भाई योगी जी सादर, गणतंत्र दिवस से गण अलग होते जा रहा है.यह चिंता का विषय है. आपने रचना को अच्छा विस्तार दिया है हार्दिक आभार. वंदे मातरम.

alkargupta1 के द्वारा
24/01/2013

आदरणीय अशोक जी, एक कटु सत्य पर प्रहार करती सार्थक रचना वन्देमातरम

    akraktale के द्वारा
    25/01/2013

    आदरेया अलका जी सादर आभार. वंदे मातरम.

Rajesh Dubey के द्वारा
24/01/2013

सुन्दर व्यंग रचना. आज-कल अपने आकाओं को खुश रखने के लिए मंत्री, संतरी और प्रजा सभी वन्दे मातरम बोल रहे है.

    akraktale के द्वारा
    25/01/2013

    सादर आभार आदरणीय राजेश जी. वंदे मातरम.

24/01/2013

सादर प्रणाम! बोलो वन्दे मातरम, बोलो वन्दे मातरम/ बोलो वन्दे मातरम, बोलो वन्दे मातरम/.सुन्दर अति सुन्दर…………….. मूर्खों के राष्ट्र में, हर रोज उपजते वाद पर, बहरा राजा-अंधी प्रजा पर, बोलो वन्दे मातरम/………………..वन्दे मातरम………….वन्दे मातरम. (नोट- यहाँ ”वाद” मतलब; भाषावाद, क्षेत्रवाद, हिन्दुवाद, मुस्लिमवाद, उग्रवाद, आतंकवाद,कुकुर्वाद, बिलायवाद, चुहावाद, शेरवाद, ityaadi

    akraktale के द्वारा
    25/01/2013

    प्रिय अनिल जी सादर, आपने मेरी ही बात को आगे बढ़ाया है. सादर आभार. वंदे मातरम.

    26/01/2013

    जी नहीं सर…………………..आपकी सारी पक्तियों का समर्थन है सिवाय…………………हिंदुओं के राष्ट्र में, हिंदू आतंकवाद पर, तुगलकी सरकार पर, बोलो वन्दे मातरम/…………….क्योंकि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं ………..जो आरोप लगा रहे हैं और जो आरोपित है ……………..सब उसमे शामिल है………………..

    akraktale के द्वारा
    27/01/2013

    मित्र यह ना मै कह रहा हूँ ना देश कह रहा है यह तो सरकार की तुगलकी सोच है वही मैंने प्रस्तुत किया है.

    ANIL KUMAR ALINE के द्वारा
    30/01/2013

    सर माफ़ करियेगा……………………..मैं भी आपकी बात नहीं कर रहा………………..यह सच है कि जिसने कहाँ है वो गलत ( सरकार) है पर यह भी सच है जिसके बारे में कहाँ है …………१००% सच कहाँ है…………….पर इस सच को स्वीकार करना तबतक मुश्किल है जबतक हम अपने स्वार्थ, सत्ता और वर्चस्व से जुड़े हैं………….

Mohd Haneef "Ankur" के द्वारा
23/01/2013

भाई साहब, वंदेमातरम की वास्तिवकता को दरकिनार करने वालों के लिए करारा प्रहार करती रचना. बधाई. वंदेमातरम-इन्कलाब ये कह कह कर! चूम लिए फांसी के फंदे रह रह कर !!

    akraktale के द्वारा
    25/01/2013

    भाई अंकुर जी बहुत दिनों बाद मंच पर आपको देख रहा हूँ. इश्वर करे आप कुशल हों. बहुत सुन्दर शेर के साथ आपने अपनी आवाज बुलंद की है. इतनी सुन्दर प्रतिक्रिया के लिए हार्दिक आभार. वंदे मातरम.

chaatak के द्वारा
23/01/2013

वन्देमातरम !

    akraktale के द्वारा
    25/01/2013

    सादर आभार चातक जी. वंदे मातरम.

seemakanwal के द्वारा
23/01/2013

जनता गई भाड में, रानी कि सन्तान पर, निश्चिन्तन दरबार पर, बोलो वन्दे मातरम/चुटीली रचना हार्दिक आभार

    akraktale के द्वारा
    23/01/2013

    आदरेया सीमा जी सादर आभार. वंदे मातरम.

vaidya surenderpal के द्वारा
23/01/2013

देश की वर्तमान दुर्दशा पर प्रहार करती रचना के लिये आभार। वन्दे मातरम्

    akraktale के द्वारा
    23/01/2013

    आदरणीय सुरेन्द्रपाल जी सादर, हार्दिक आभार. वंदे मातरम.

yatindranathchaturvedi के द्वारा
23/01/2013

बोलो वन्दे मातरम/

    akraktale के द्वारा
    23/01/2013

    सादर आभार. वंदे मातरम.

vinitashukla के द्वारा
22/01/2013

वर्तमान राष्ट्रीय परिदृश्य के, कटु सत्य को, उजागर करने वाली प्रभावी एवं सार्थक रचना. बधाई एवं साधुवाद.

    akraktale के द्वारा
    23/01/2013

    सादर आभार आदरेया विनीता जी सादर.

bhanuprakashsharma के द्वारा
22/01/2013

आज के सच से परिचय कराती सुंदर रचना। इसे पढ़कर मुझे मेरे एक मित्र डा. अतुल शर्मा  के गीत की पंक्तियां याद आ गई।  -झंडे जी की जय बोलो, डंडे जी की जय बोलो -सांस रोक कर खड़े-खड़े  अधिनायक की जय बोलो ये मजाक न दोहराओ, ओ शब्दों के कारीगर अब तो सड़कों पर आओ, ओ शब्दों के कारीगर। 

    akraktale के द्वारा
    23/01/2013

    आदरणीय भानु जी सादर, यह रचना कुछ पढ़ी पढ़ी सी लग रही है. सुन्दर प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार. वंदे मातरम.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
22/01/2013

अब न सहो सब कुछ कहो चुप रहना बेइमानी है खुल के कहो वन्दे मातरम् वन्दे मातरम् वन्दे मातरम् आदरणीय अशोक जी सादर अभिवादन बधाई.

    akraktale के द्वारा
    23/01/2013

    आदरणीय प्रदीप जी सादर,जरूर कहें वंदे मातरम, 

munish के द्वारा
22/01/2013

वन्दे मातरम् …… इसको बोलने पर सरकार और तथाकथित सेक्युलर नेता बुरा मान सकते हैं ….

    akraktale के द्वारा
    23/01/2013

    मुनिश जी सादर, पहले ये नेताजी सेकुलर की परिभाषा लिख दें फिर विचार करेंगे. अभी कहें वन्दे मातरम.

minujha के द्वारा
22/01/2013

वन्दे मातरम रक्ताले जी,वैसे जो भी कह लें,इसके उच्चारण मात्र से ही एक स्फुर्ति स्वत जागृत हो जाती है….अब कौन  इसे कैसे ले रहा है  ये अपने अपने विवेक की बात है…..बहुत सुंदर शब्द-संयोजन,बधाई

    akraktale के द्वारा
    23/01/2013

    आदरेया मीनू जी सादर, आप सही कह रही हैं किन्तु जो दिल से आवाज निकालनी चाहिए वह क्यों नहीं निकल रही है? सीधी सी बात है देश में आज आजादी और क़ानून कुछ लोगों के लिए ही रह गये हैं. बाक़ी सबकी स्थिति तो वही है जो अंग्रेजों के वक्त थी. सादर. वंदे मातरम.

nishamittal के द्वारा
22/01/2013

एक कटु सत्य को उद्घाटित करती बहुत प्रभावी रचना .

    akraktale के द्वारा
    23/01/2013

    आदरेया निशा जी सादर आभार. वंदे मातरम.

shashibhushan1959 के द्वारा
22/01/2013

आदरणीय अशोक भाई, सादर ! व्यर्थ के गणतंत्र दिवस पर हार्दिक खेद ! “”इस स्वतंत्र देश के, गणतंत्र दिवस पर, जनगण परतंत्र पर, बोलो वन्दे मातरम”" एक एक अक्षर सही लिखा है आपने ! अब तो यह बस एक सरकारी दिखावा रह गया है ! सादर !

    akraktale के द्वारा
    23/01/2013

    आदरणीय शशि जी सादर, आप ठीक कह रहे हैं. परिस्थितियाँ विपरीत हैं किन्तु खेद सहित दिखावे के लिए हम कह ही रहे हैं वंदे मातरम.

santosh kumar के द्वारा
22/01/2013

आदरणीय भाई जी ,..सादर प्रणाम कटुतम सच बताती बहुत तीखी रचना ,….सब वन्देमातरम नहीं बोलने का ही परिणाम लगता है ….सादर वन्देमातरम

    akraktale के द्वारा
    23/01/2013

    संतोष जी भाई सादर आभार. वंदे मातरम,

akraktale के द्वारा
31/01/2013

सादर!


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