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खुशी कैसी

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पुराना जब भी जाता है नया इक साल आता है,

नया जब साल आता है उम्मीदे साथ लाता है/

 

कोई इक बार आकर के व्यथा उनसे भी तो पूछो,

जिन्हें आते हुए नव साल का इक पल न भाता है/

 

कभी तुम झाँक लो देखो जरा उस मन की तो बूझो,

बुझी उम्मीद है जिसकी  अँधेरा  अब  सताता है/

 

शमाएँ तुम जलालो चढ के जा जाकर मीनारो पे,

नही कर पाओगे रोशन यही अब दिल में आता है/

 

सबक इस हादसे हालात से पाकर के तुम समझो,

खुशी कैसी लगे जब कोई  इक मातम मनाता है/



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55 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Danyon के द्वारा
11/07/2016

Tient, je constate sans grande surprise que vous avez supprimé mon commentaire. Difficile d’accepter la contradiction quand on est prof ? Je vous assure, allez faire un tour dans les banlieues &l&nco;aqbsp;uhaudes », ça vous changera de vos bisounours, et vous découvrirez que l’enseignement, ce n’est pas raconter des jolies histoires à dormir debout sur un blog.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
11/01/2013

सबक इस हादसे हालात से पाकर के तुम समझो, खुशी कैसी लगे जब कोई इक मातम मनाता है/ आदरणीय अशोक जी, सादर अभिवादन सुन्दर भाव. सहमत

    akraktale के द्वारा
    12/01/2013

    आदरणीय प्रदीप जी सादर,हार्दिक आभार. आप सदैव स्वस्थ रहे यही मनोकामना है.सादर.

Santlal Karun के द्वारा
10/01/2013

आदरणीय ए.के. रक्ताले जी, जैसा कुछ वर्षांत में हुआ और उससे आहत संवेदना का यह नववर्षी पीड़ा-गीत ह्रदय-वेधी गीत-सा लगा; हार्दिक साधुवाद एवं सदभावनाएँ ! “सबक इस हादसे हालात से पाकर के तुम समझो, खुशी कैसी लगे जब कोई इक मातम मनाता है/”

    akraktale के द्वारा
    12/01/2013

    आदरणीय संतलाल जी सादर,आपसे रचना भावों पर सराहना पाकर मन हर्षित हुआ.अवश्य ही वर्षांत की घटना से सभी देशवासियों को झकझोर कर रख दिया.

alkargupta1 के द्वारा
09/01/2013

आदरणीय अशोक जी , सामयिक व भावपूर्ण रचना

    akraktale के द्वारा
    12/01/2013

    आदरेया अलका जी सादर, प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार.

minujha के द्वारा
09/01/2013

सार्थक रचना रक्ताले जी,देर से ही सही नववर्ष की शुभकामनाएं

    akraktale के द्वारा
    12/01/2013

    आदरेया मीनू झा जी सादर,नव वर्ष आपको भी शुभ हो.रचना सराहने के लिए हार्दिक आभार.

kumarpradeep के द्वारा
08/01/2013

सार्थकता से परिपूर्ण रचना है.बधाई

    akraktale के द्वारा
    12/01/2013

    हार्दिक आभार आदरणीय कुमार प्रदीप जी.

Alka के द्वारा
07/01/2013

आदरणीय रक्ताले जी , नववर्ष की शुभ कामनाएं | आपकी रचनाएँ हमेशा मनको छू जाती है एक सार्थक प्रस्तुति

    akraktale के द्वारा
    08/01/2013

    अलका जी सादर. आपका पुनः हार्दिक आभार.

प्रवीण दीक्षित के द्वारा
07/01/2013

आपकी कलम चुंबकीय है जो सहज ही पाठकों को अपनी ओर आकष्ज्र्ञित करता है …….. पढ़कर कृतज्ञ हुआ ….. हमारे ब्लाॅग पर भी पधारें … !

    akraktale के द्वारा
    08/01/2013

    मनोबल बढाने के लिए आपका हार्दिक आभार. लो जी मै अभी हाजिर हुआ. 

satish mittal के द्वारा
06/01/2013

बहुत खूब अशोक जी -खुशी कैसी लगे जब कोई इक मातम मनाता है/ एकदम सही / जब देश की बेटी के गम में सब डूबे हों तो नव वर्ष में भी कुछ अच्छा नहीं लगता / पर ये जीवन हें जीवन चुनोती समझ कर जीने में ही मजा आता हें / नव वर्ष पर गम जदा होकर भी नववर्ष शुभ हो कहने को दिल करता हें

    akraktale के द्वारा
    08/01/2013

    आदरणीय सतीश जी सादर, सच है गुजरा कल कुछ भी हो आने वाले दिन के लिए हमारे मन में अच्छे की ही आस होती है. सादर आभार.

ANIL KUMAR ALINE के द्वारा
06/01/2013

सादर प्रणाम! कोई इक बार आकर के व्यथा उनसे भी तो पूछो, जिन्हें आते हुए नव साल का इक पल न भाता है/ शमाएँ तुम जलालो चढ के जा जाकर मीनारो पे, नही कर पाओगे रोशन यही अब दिल में आता है/ सबक इस हादसे हालात से पाकर के तुम समझो, खुशी कैसी लगे जब कोई इक मातम मनाता है/””””””””””””’सच को अपने दामन में धुन्धती रचना……………..नव चिंतन और नव अवलोकन को प्रेरित करती है……………हार्दिक आभार…………..!

    akraktale के द्वारा
    08/01/2013

    प्रिय अनिल जी आपने वक्त निकाल कर प्रतिक्रया दी सम्बल दिया प्रसन्नता हुई. हार्दिक आभार.

yatindranathchaturvedi के द्वारा
06/01/2013

संवेदनाओं का अद्भुत प्रवाह, आदरणीय akraktale जी। नववर्ष की शुभकामनाएं

    akraktale के द्वारा
    08/01/2013

    आदरणीय यतींद्रनाथ जी सादर, आपसे प्रतिक्रया पाकर प्रसन्नता हुई. हार्दिक आभार.

ajay kumar pandey के द्वारा
05/01/2013

सबक इस हादसे हालात से पाकर के तुम समझो ख़ुशी कैसी लगे जब कोई इक मातम मनाता है कभी तुम झाँक लो देखो जरा इस मन की तो बूझो बुझी उम्मीद है जिसका अँधेरा अब सताता है बहुत बढ़िया अशोक जी जब देश में ही हैवानियत हो रही है तो हम नया साल कैसे मना सकते हैं हम तो येही चाहते हैं की आने वाले समय में कोई हैवानियत ना हो नारी का सम्मान हो और नारी सुरक्षित हो हम येही चाहते हैं नारी की अस्मिता को बनाये रखें लोग हम येही चाहते हैं आपको नववर्ष की मुबारकबाद और ढेरों बधाइयाँ नववर्ष आपके लिए शुभ हो यही कामना है और आपके बेहतरीन शब्द पढने को मिले अच्छा लगा पढ़कर नववर्ष की शुभकामनाएं धन्यवाद

    akraktale के द्वारा
    08/01/2013

    अजय जी सादर, मेरे विचारों पर सहमति दर्शाने के लिए आपका बहुत बहुत शुक्रिया.

sumandubey के द्वारा
05/01/2013

अशोक भाई नमस्कार , परिवार सहित नव वर्ष की बधाई ,आप उजैज्न के है अनुभूति पर आपकी रचना पढ़ी कभी तुम झाँक लो देखो जरा उस मन की तो बूझो, बुझी उम्मीद है जिसकी अँधेरा अब सताता है/ शमाएँ तुम जलालो चढ के जा जाकर मीनारो पे,—————————-सुन्दर लिखा

    akraktale के द्वारा
    08/01/2013

    आदरेया सुमन बहन जी सादर, क्षमा करें कुछ देरी से अपने ब्लॉग पर आया हूँ प्रसन्नता हुई आपने अनुभूति पर  मेरी छंद रचनाएँ पढीं. इस रचना के अनुमोदन के लिये भी आपका बहुत बहुत आभार.

pragati के द्वारा
03/01/2013

बेहद उम्दा रचना

    akraktale के द्वारा
    08/01/2013

    प्रगति जी सादर आभार.

yogi sarswat के द्वारा
03/01/2013

कभी तुम झाँक लो देखो जरा उस मन की तो बूझो, बुझी उम्मीद है जिसकी अँधेरा अब सताता है/ शमाएँ तुम जलालो चढ के जा जाकर मीनारो पे, नही कर पाओगे रोशन यही अब दिल में आता है/ सबक इस हादसे हालात से पाकर के तुम समझो, खुशी कैसी लगे जब कोई इक मातम मनाता है/ पूर्णता किसी में भी नहीं होती आदरणीय श्री रक्ताले जी ! न इंसान में , न व्यवस्था में , न कानून में , न संसार में ! कहीं न कहीं , कोई न कोई कमी अवश्य रहती ही है ! लेकिन इन कमियों को पहिचान लेना , उनको दूर करने के लिए प्रयासरत रहना ही तो मानव का कर्त्तव्य और उसकी जिम्मेदारी बनती है ! आपने नव वर्ष के मुबारक मौके पर जो शब्द प्रस्तुत किये हैं , एक सच की तरफ इशारा करते हैं ! बहुत बढ़िया , बहुत दिनों के बाद आपको पढ़ रहा हूँ , और बेहतरीन शब्द पढ़ रहा हूँ !

    akraktale के द्वारा
    03/01/2013

    आदरणीय योगी जी सादर, आपसे इतनी सुन्दर प्रतिक्रया पाकर मन को संतोष हुआ आपका हार्दिक आभार. स्नेह बनाए रखें.

deepasingh के द्वारा
02/01/2013

वन्दे मातरम आदरणीय अशोक जी. सत्यता लिय ह्रदय स्पर्शी रचना पर बधाई.पर जो लड़ाई शुरू की है वो जारी रखनी होगी इई पर मेरी रचना कालना होगा बिना रुके को समय निकलकर अवश्य पढियेगा. http://deepasingh.jagranjunction.com पर.धन्यवाद.

    akraktale के द्वारा
    03/01/2013

    दीपा जी सादर, अवश्य ही आपकी रचना पढूंगा. आपका हार्दिक आभार.

sudhajaiswal के द्वारा
02/01/2013

कोई इक बार आकर के व्यथा उनसे भी तो पूछो, जिन्हें आते हुए नव साल का इक पल न भाता है/ कभी तुम झाँक लो देखो जरा उस मन की तो बूझो, बुझी उम्मीद है जिसकी अँधेरा अब सताता है/ आदरणीय अशोक जी, सादर अभिवादन, समयानुकूल और मार्मिक रचना के लिए आभार | ईश्वर से प्रार्थना है कि इस वर्ष सकारात्मक परिवर्तन हो |

    akraktale के द्वारा
    03/01/2013

    अवश्य ही आने वाला समय अच्छा हो यही कामना है. आपका हार्दिक आभार आदरेया सुधा जी. 

vinitashukla के द्वारा
02/01/2013

“सबक इस हादसे हालात से पाकर के तुम समझो, खुशी कैसी लगे जब कोई इक मातम मनाता है” संवेदनशील, समसामयिक रचना. आपकी भावनाओं को नमन.

    akraktale के द्वारा
    03/01/2013

    आदरेया विनीता जी सादर, हार्दिक आभार आपका.

RaJ के द्वारा
02/01/2013

अशोक जी कहीं कुछ पंक्ति याद आ गयी जलाओ दीये पर इतना ध्यान रहे कि धरा पर अँधेरा रह न जाये कहीं समाज यदि उन्मादी आक्रोश के बाद सतत व् गंभीर प्रतिकार इन घटनाओ का करे तो सूरत नहीं कि ये सब काबू में आ सकता है

    akraktale के द्वारा
    03/01/2013

    जलाओ दीये पर इतना ध्यान रहे कि धरा पर अँधेरा रह न जाये कहीं बहुत सुन्दर पंक्तियाँ प्रस्तुत कि है आदरणीय राज साहब. हार्दिक आभार.

seemakanwal के द्वारा
01/01/2013

काश आने वाले समय में ऐसी हैवानियत न हो यही हम सभी की प्रार्थना है . मार्मिक रचना .

    akraktale के द्वारा
    01/01/2013

    आभार कभी भी ऐसी हैवानियत ना हो हम यही तो चाहते हैं आदरेया सीमा जी आपका हार्दिक आभार.

bharodiya के द्वारा
01/01/2013

तारीख बदलने से समय का स्वभाव नही बदलता, नसीब नही बदलता । गुजरा कल बूरा था, आज बूरा है तो आनेवाले कल अच्छा हो ऐसी कामना ही कर सकते हैं ।

    akraktale के द्वारा
    01/01/2013

    भाई भरोदिया जी हाँ भविष्य के गर्त में क्या छिपा है कोई नहीं जानता हम भी कल कि खुशहाली के लिए कार्य करें इस मकसद के साथ कि हम अवश्य ही कामयाब होंगे तो आधी कामयाबी तभी हासिल है. आभार.

jlsingh के द्वारा
01/01/2013

सबक इस हादसे हालात से पाकर के तुम समझो, खुशी कैसी लगे जब कोई इक मातम मनाता है/ आदरणीय महोदय, सादर अभिवादन! आपकी पीड़ा समझ सकता हूँ! यह पूरे देश की पीड़ा है! द्रौपदी की पीड़ा भी महाभारत का अकारण बनी थी … यह चिंगारी जो अब शोला बन चुकी है, ब्यर्थ नहीं जायेगी!

    akraktale के द्वारा
    01/01/2013

    हाँ भाई जी आदरणीय जवाहर जी बिलकुल आज यह पूरे देश की पीड़ा है.और इसे व्यर्थ जाना भी नही चाहिए. आमीन. 

krishnashri के द्वारा
31/12/2012

आदरणीय रक्ताले जी , सादर , जब गम घेरे हो तो ख़ुशी कैसे मनाएं . मेरी शुभकामना .

    akraktale के द्वारा
    01/01/2013

    शुभकामनाएं आदरणीय श्री कृष्णा श्री जी सादर. 

Rajesh Dubey के द्वारा
31/12/2012

खुशी कैसी लगे जब कोई इक मातम मनाता है/ बहुत सुन्दर पंक्तियाँ भावों से भरपूर. खैर निराश होने की जरुरत नहीं है, नया जब साल आता है उम्मीदे साथ लाता है/. चलिए नए उम्मीदों से दुनिया को बल प्रदान करे.

    akraktale के द्वारा
    01/01/2013

    जरूर जरूर आदरणीय राजेश जी भाई अवश्य उम्मीद का दामन नहीं छोडना है. आपका हार्दिक आभार.

    akraktale के द्वारा
    01/01/2013

    सादर आदरणीय तुफैल सिद्धकी जी हार्दिक आभार.

Sushma Gupta के द्वारा
31/12/2012

आदरणीय अशोक जी, आपकी बात पूर्णरूप से सही है ,इस नव -बर्ष की कोई ख़ुशी नहीं है , क्योंकि किसी के घर की तो रौशनी ही चली गयी है ,फिर ख़ुशी कैसी ?एस संवेदनात्मक अभिव्यक्ति के लिए आभार …

    akraktale के द्वारा
    01/01/2013

    आपका हार्दिक आभार आदरेया सुषमा जी सादर.

nishamittal के द्वारा
31/12/2012

भावपूर्ण रचना कैसे मनाई जा सकती है खुशी बस शुभकामनाएं .आपको व परिवार को

    akraktale के द्वारा
    01/01/2013

    सादर आदरेया निशा जी. आपको भी सपरिवार हार्दिक शुभकामनाएं नव वर्ष की. 

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
31/12/2012

सबक इस हादसे हालात से पाकर के तुम समझो , खुशी कैसी लगे जब कोई इक मातम मनाता है !…. बेहद संवेदनशील रचना के लिए हार्दिक बधाई भाई अशोक रक्तले जी ! पुनश्च !

    akraktale के द्वारा
    01/01/2013

    आपका हार्दिक आभार आदरणीय आचार्य जी सादर.


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