badalte rishte

Just another weblog

64 Posts

4839 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 5350 postid : 577

नवरात्रि कि शुभकामनाएं!

  • SocialTwist Tell-a-Friend

2012100813496757652060257725

 

 

 

 

 

 

 

 

नव रात्री नव रात है,नव जीवन संदेश/ 

तन मन भवन शुद्ध रखो,आये माँ किस भेष// 

भक्तगण नव रात्री में,रखते हैं उपवास/ 

कन्या पूजन भी करें,माँ का यही निवास// 

देखो कैसे सज रहा,माता का दरबार/ 

माँ के दर्शन को लगी,लम्बी बहुत कतार// 

जयकारों से मात के,गूंज रहा दरबार/ 

माता का आशीष ले,पायें शक्ति अपार// 

गरबा रमती मात है,चहुँ दिसि उत्सव होय/

भक्त यहाँ सुख पात हैं,सबके मंगल होय//

हवन अरु जागरण करे,नवरात्री सब लोग/

देती माँ आशीष जो,मिटे क्लेश सब रोग//

धन धान्य और सम्पदा,वैभव खिल खिल जाय/

निश दिन पूजे मात को,सब सम्भव हो जाय//



Tags:     

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (1 votes, average: 5.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

43 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Velvet के द्वारा
11/07/2016

Great post, Becky! I love that you put your characters on such real spiritual journeys! I think that was why I liked My Stubborn Heart soooo much! And yes, oh yes, how we need HIS wisdom in &#88&0;making2#2221; those spiritual character arcs!

yamunapathak के द्वारा
25/10/2012

आदरणीय अशोक जी आपकी शुभकामना का यह अंदाज़ हमें बहुत अच्छा लगा.बहुत ही सुन्दर पंक्तियाँ हैं. निश दिन पूजे मात को,सब सम्भव हो जाय//

manoranjanthakur के द्वारा
23/10/2012

बहुत बधाई

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
20/10/2012

निश दिन पूजे मात को , सब संभव हो जाय ! मान्य रक्तले जी, सप्रेम नमस्कार !.. दोहा -छंद में माँ की आराधना मन को पवित्र कर गयी ! हार्दिक आभार !!

    akraktale के द्वारा
    21/10/2012

    सादर आभार आदरणीय आचार्य जी.

shashibhushan1959 के द्वारा
18/10/2012

आदरणीय अशोक जी, सादर ! “”धन धान्य और सम्पदा,वैभव खिल खिल जाय/ “निश दिन” पूजे मात को,सब सम्भव हो जाय//”"” नवरात्रि के पावन अवसर पर आपका यह आह्वान सम्पूर्ण जगत के लिए मंगलकारी हो, यही कामना है ! सादर !

    akraktale के द्वारा
    20/10/2012

    आदरणीय शशिभूषण जी                     सादर, आपके शब्द सत्य हों यही मंगल कामनाएँ है. आभार.

Madan Mohan saxena के द्वारा
18/10/2012

वन्दे वांछितलाभाय चन्दार्धकृतशेखराम। वृषारूढां शूलधरां शैलपुत्री यशस्विनीम्।। बेह्तरीन अभिव्यक्ति .आपका ब्लॉग देखा मैने और नमन है आपको और बहुत ही सुन्दर शब्दों से सजाया गया है लिखते रहिये और कुछ अपने विचारो से हमें भी अवगत करवाते रहिये.

    akraktale के द्वारा
    20/10/2012

    आदरणीय मदन मोहन जी                            सादर, आपकी सुन्दर भक्तिपूर्ण प्रतिक्रया के लिए हार्दिक धन्यवाद.

bhanuprakashsharma के द्वारा
18/10/2012

सुंदर रचना के लिए आभार। 

    akraktale के द्वारा
    20/10/2012

    धन्यवाद. आदरणीय भानुप्रकाश जी.

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
18/10/2012

आदरणीय अशोक जी,सादर. बहुत सुन्दर कविता. हवन अरु जागरण करे,नवरात्री सब लोग/ देती माँ आशीष जो,मिटे क्लेश सब रोग// धन धान्य और सम्पदा,वैभव खिल खिल जाय/ निश दिन पूजे मात को,सब सम्भव हो जाय// बहुत सुन्दर पंक्तियाँ.नवरात्रि की मंगलकामनाएं.

    akraktale के द्वारा
    20/10/2012

    आदरणीय राजीव जी                         सादर, आपको रचना अच्छी लगी लिखना सफल हुआ. आपको भी नवरात्री कि हार्दिक शुभकामनाएं.

mataprasad के द्वारा
18/10/2012

आदरणीय अशोक जी , जय माता दी . घर – घर में सजा माँ का दरबार जो भी भक्त माँ को ध्यावे उसका बेडा पार|| जय माता दी !! सपरिवार आप को नवरात्री की ढेर सारी शुभकामनाये !!

    akraktale के द्वारा
    20/10/2012

    माताप्रसाद जी                सादर, रचना पर आपकी छंदमय प्रतिक्रया पाकर हर्ष हुआ.हार्दिक आभार. आपको भी सपरिवार नवरात्रि पर्व कि शुभकामनाएं.

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
18/10/2012

भक्तगण नव रात्री में,रखते हैं उपवास/ कन्या पूजन भी करें,माँ का यही निवास// रक्तलेजी, जय माता दी,,,,,,अत्यंत सुंदर श्रद्धाभाव से परिपूर्ण रचना…………………

    akraktale के द्वारा
    20/10/2012

    आदरणीय के.पी. सिंह साहब                                   सादर, इस भक्तिमय रचना पर आपका स्नेह पाकर प्रसन्नता हुई. आभार.

D33P के द्वारा
17/10/2012

अशोक जी ,आपको भी  नवरात्रि की हार्दिक मंगलकामनाएं……….

    akraktale के द्वारा
    20/10/2012

    आदरेया दीप्ति जी                       सादर, आपको भी नवरात्रि कि हार्दिक शुभकामनाएं.

seemakanwal के द्वारा
17/10/2012

आदरणीय अशोक जी बहुत sundar भक्ति रचना .

    akraktale के द्वारा
    20/10/2012

    आदरेया सीमा जी                       आपने रचना को सराहा मेरा लिखना सफल हुआ. हार्दिक आभार.

ANAND PRAVIN के द्वारा
17/10/2012

आदरणीय अशोक सर, सादर प्रणाम माँ की लीला अपरम्पार है ……….नवरात्री वैसे तो मुख्यतः इसका मजा गुजरात में ज्यादा होता है क्यूंकि हमारे यहाँ बिहार में माँ का पट सातवी पूजा के बाद ही खुलता है किन्तु पूजा शुरू होने के पश्चात घर तथा बाहर का माहौल सुगन्धित हो जाता है…………..आपको सपरिवार सहित नाव्रात्री की हार्दिक शुभकामना और सुन्दर कविता के लिए बधाई सर

    akraktale के द्वारा
    17/10/2012

    प्रिय आनंद जी सादर, सही कहा है आपने माँ कि लीला अपरम्पार है नवरात्रि में हम मुख्यतः हम माँ को शक्ति के रूप में ही पूजते हैं किन्तु माँ भक्तों को बल विद्या धन वैभव सभी के वर देती हैं. सभी प्रान्तों में पूजा का विधान भिन्न हो सकता है किन्तु पडवा से लेकर नौमी तक पूजन सभी जगह होता है. गरबों के कारण गुजरात का अधिक नाम है गरबों कि संस्कृति में भी विकार आया है इस पर कभी अवसर मिला तो लिखूंगा. आपको सपरिवार नवरात्रि कि शुभकामना.ओह! कुछ याद आया इस वर्ष आपका भी गरबे खेलने का कुछ ज्यादा ही मन कर रहा होगा. हा हा हा…..

    Santosh Kumar के द्वारा
    17/10/2012

    श्रद्धेय ,..सादर प्रणाम जयकारों से मात के,गूंज रहा दरबार/ माता का आशीष ले,पायें शक्ति अपार// ……नवरात्रि की हार्दिक मंगलकामनाएं …सादर

    akraktale के द्वारा
    20/10/2012

    आभार. आ. संतोष भाई जी.

अजय यादव के द्वारा
17/10/2012

आदरणीय  ए के रक्ताले साहेब .. यह बड़ी बिडम्बना और ग्लानि का विषय है कि , हम भारतीय , महिलाओं के प्रति इतना सम्मान , आदर और श्रद्धा रखते हैं , साल में दो बार देवी के पर्व मनाते हैं पर इसका प्रभाव वह नहीं है जो हम पर्वों , चित्रों , मंदिरों , यज्ञों , जागरणों में ब्यक्त , प्रदर्शित करते हैं ….देवी जो नारी कि प्रतिदेवी हैं , उनके प्रति हमारा रोज-बरोज का रवैया , बहुत दुखद , खेदजनक और घृणास्पद है , जो कहता है – हम सभी तो नहीं पर अतिअधिक मनसा -वाचा-कर्मणा एक नहीं हैं ….इसपर हमे सोचना चाहिए और नारी के प्रति , समानता , श्रद्धा , सम्मान , ब्यवहार में लाना चाहिए , ( इसका अर्थ नर -नारी में परस्पर , स्नेह , प्रेम , संपर्क , सम्बन्ध , प्रेम , मित्रता का निषेध नहीं है , समानता -आदर की दरकार है ) ….आज समाज में जो नारी का शोषण हर स्तर पर दृश्यमान है , वह हमारी भारतीय संस्कृति , सभ्यता और सोच पर एक बदनुमा दाग है ……एक देवी की फोटो लगा कर , जागरण कर और पैदल पहाड़ों पर चढ़ कर देवी की पूजा अर्चना और व्रत -पूजा करके जय देवी कहने से , भला होने की प्रवृत्ति पर विचार करने की जरूरत है ……भक्त , देवता -देवी , मंदिर -संयासी सभी को पुनर- प्राण -प्रतिष्ठा की जरूरत है ……पत्थर की देवी की पूजा , दया , की मांग और जीवित देवी का नाना-प्रकार से शोषण , क्या यह हमारा दोहरा चरित्र नहीं है ?

    अजय यादव के द्वारा
    17/10/2012

    रक्ताले साहेब |आप से अनुरोध हैं कि ….मेरी अगर कोई रचना पसंद ना आये तो उस रचना पर टिप्पडी कीजिये …किन्तु मैं हरियाणा से हूँ या लन्दन से ………..आपकी वो बात नही पसंद हैं मुझे | आपको यह हक नही हैं कि आप किसी स्थान विशेष को ……अपने स्थान विशेष से निम्न माने |मनोहर कहानियो वाली फिलोसफी ….आपको पसंद नही हैं …आप एक सामाजिक मंच पर हैं ….किन्तु आपकी जक्सन कि बेबसाईट सबसे ज्यादा सेक्सुअल सस्ते जोक्स/लेखो या के लिए हिट कि जातीं हैं ….संभव हों तो उसका विरोध कीजिये |आप जानना चाहते हैं तो आप को मैं बता दूँ कि मैं बेसिकली इलाहाबाद से हूँ और प्रतिष्ठित एम्स में डॉ हूँ |आपका मैं सम्मान बहुत करता हूँ और मैं खुद उस तरह के लेख नही लिखता , इसलिये उस पोस्ट को वहाँ से हटा दिया हूँ |वहाँ उस लेख को रखना मेरी जरूरत थी ,उस समय कि क्यूंकि उस पर विस्तृत पटकथा वा फिल्मांकन होना हैं |

    akraktale के द्वारा
    17/10/2012

    अजय जी              सादर, सर्व प्रथम आपसे सौ सौ बार क्षमा प्रार्थना हर उस बात के लिए जो आपको मेरी टिपण्णी में बुरी लगी हो. आपने अपना जो परिचय दिया है उससे मै पूर्व से अवगत हूँ. आपके ब्लॉग पर अक्सर मै टिपण्णी करता हूँ. इसलिए आपकी लेखनी से मै परिचित हूँ.यही कारण है कि मैंने आपको अच्छे विषय चुनने कि सलाह दी है.मंच पर कई वर्ग द्रष्टिगत होते हैं.मंच पर अश्लीलता पर पहले शायद आदरणीय भूपेंद्र जी पूरा एक आलेख लिख चुके हैं. क्या आप चाहते हैं कि आप अपना लेखन अवनति कि ओर ले जाएँ?             आपके बारे में जानते हुए हरियाणा के होने का लिखने का कारण को आप भलीभांति समझ सकते हैं. आप को अपना आलेख हटाना पड़ा इसका मुझे हार्दिक खेद हैं मगर फिरभी मै आपका इस बात के लिये आभारी हूँ.             हम नारी का सम्मान करते हैं और देवितुल्य मानकर सम्मान करते हैं. प्रतिदिन के व्यवहार में भी हम नारी के साथ उसके रिश्ते के अनुसार सम्बन्धों का निर्वाह करते हैं.यह किसी भी प्रकार से अनुचित नहीं है.करोड़ों कि गिनती में हम चंद लोगो के गलत व्यवहार को उदाहरण नहीं बना सकते.अधिक ना लिखते हुए मै आशा करता हूँ कि आप मेरे मंतव्य को समझे और समाज के लिए कुछ अच्छा लिखें जैसा कि आपके पूर्व के आलेखों में मैंने पढ़ा है. आपका लेखन उत्तरोत्तर उन्नति के पथ पर जाए. यही मेरी शुभकामना है.                             

    jlsingh के द्वारा
    18/10/2012

    प्रिय अजय जी, आदरणीय अशोक जी के जवाब से संभवत: आप संतुष्ट होंगे आपके पूर्व के आलेखों और आपके व्यक्तित्व के अनुरूप नहीं था वह आलेख (कहानी) इसलिए मैंने भी आपको सलाह दी थी कि उसे आप हटा लें … आपने सलाह मान कर अपनी नेकनीयती (अच्छे इन्सान) होने का परिचय दिया है, पर आपकी खीज बतला रही है कि आपको उसे हटाकर दुःख हुआ है…. सच्चाई थोड़ी कड़वी होती है. पर कभी कभी उसे दवा समझ पी लेना चाहिए! आपने कितने अच्छे अच्छे उदाहरण दिए है – अवचेतन मन की श्रृंखला में सभी एक से बढ़कर एक, कि मैं कई बार पढ़ा हूँ और प्रशंशा भी करता हूँ! कृपया मर्यादा बनाये रखें … वैसे आप लिखने के लिए स्वतंत्र हैं …. आभार सहित!

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
17/10/2012

आदरणीय अशोक जी, सादर अभिवादन माता का जगराता है करते पूजन लोग गावें गुण जग रात भर प्रात लगाते भोग नवरात्रि की शुभ कामना. दोहा ठीक करने का कष्ट करें सर जी, बधाई.

    akraktale के द्वारा
    17/10/2012

    आदरणीय प्रदीप जी                  सादर प्रणाम, लगता है आज सबकी परीक्षा लेने निकल पड़े हैं. पहले डाक्टर साहब कि परीक्षा और अब मेरी बारी. अरे साहब आपने तो खुद ही बहुत सुन्दर दोहा लिखा है सम चरण तो त्रुटी रहित है और विषम चरणों में भी कोई खास त्रुटी नहीं है फिरभी आपका हुक्म सर आखों पर.  जगराता है मात का, करते पूजन लोग/ रात महिमा गान करें,प्रात लगाते भोग//

    shashibhushan1959 के द्वारा
    18/10/2012

    पानी डालना ही पडा !

    akraktale के द्वारा
    20/10/2012

    सादर,            सही कहा आदरणीय शशि जी किन्तु परीक्षक से कुछ अंक भी प्राप्त होंगे यह कामना थी किन्तु वे तो प्रश्नपत्र पकडाकर लुप्त हो गये हैं. सादर.

alkargupta1 के द्वारा
17/10/2012

अशोक जी ,माँ भगवती के दोहे भक्ति व आशीष से सराबोर अति सुन्दर … नवरात्रि की हार्दिक मंगलकामनाएं

    akraktale के द्वारा
    17/10/2012

    अलका जी               सादर नमस्कार, आपको नवरात्रि उत्सव के अवसर पर लिखे दोहे पसंद आये जानकार मुझे प्रसन्नता हुई. पुनः आपको नवरात्रि कि हार्दिक शुभकामनाएं.

MAHIMA SHREE के द्वारा
17/10/2012

गरबा रमती मात है,चहुँ दिसि उत्सव होय/ भक्त यहाँ सुख पात हैं,सबके मंगल होय// हवन अरु जागरण करे,नवरात्री सब लोग/ देती माँ आशीष जो,मिटे क्लेश सब रोग// धन धान्य और सम्पदा,वैभव खिल खिल जाय/ निश दिन पूजे मात को,सब सम्भव हो जाय//.. आदरणीय अशोक सर ..सादर नमस्कार . बहुत ही सुंदर दोहे माता की वंदना में और नवरात्री का पूरा दृश्य उपस्थित हो गया है …जय माता दी

    akraktale के द्वारा
    17/10/2012

    महिमा जी                सादर, आपने दोहों में नवरात्री उत्सव के द्रश्य को अनुभव किया मेरे लिए इससे बढाकर संतोष कि कोई बात हो ही नहीं सकती. बहुत बहुत धन्यवाद.

Rajesh Dubey के द्वारा
17/10/2012

शुद्धता और जीवन में पावनता के पर्व नवरात्र और मां दुर्गा से सम्बंधित दोहे बहुत ही सुन्दर है. दोहे बहुत दिनों के बाद पड़ने को मिली. बधाई

    akraktale के द्वारा
    17/10/2012

    राजेश भाई               सादर नमस्कार, सही कहा आपने मंच पर दोहे कम ही लिखे जाते हैं. आपकी सराहना से मेरा दोहे लिखना सार्थक हुआ. धन्यवाद.

ashishgonda के द्वारा
17/10/2012

मान्यवर सादर अभिवादन! सर्वप्रथम आपको नवरात्रि के शुभावसर पर हार्दिक शुभकामनायें. बहुत ही सुन्दर और सुव्यवस्थित रचना, पढ़ कर बहुत ही अच्छा लगा. जयकारों से मात के,गूंज रहा दरबार/ माता का आशीष ले,पायें शक्ति अपार// माँ भगवती आप पर सदा कृपा बनायें रखें.

    akraktale के द्वारा
    17/10/2012

    आशीष जी             सादर अभिवादन. मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है.आपकी सुन्दर प्रतिक्रया के लिए हार्दिक आभार.

jlsingh के द्वारा
17/10/2012

जय माँ दुर्गे , जय माँ दुर्गे! धन धान्य और सम्पदा,वैभव खिल खिल जाय/ निश दिन पूजे मात को,सब सम्भव हो जाय// आदरणीय अशोक भाई जी, आपको भी नवरात्रि की शुभकामनायें! माँ दुर्गा हम सबका कल्याण करें!

    akraktale के द्वारा
    17/10/2012

    आदरणीय जवाहर जी भाई                          सादर नमस्कार, माँ दुर्गा को शत शत नमन. पुन्ह आपको नवरात्रि कि शुभकामनाएँ.


topic of the week



latest from jagran