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बंद ने खोली पोल!

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        चित्र नेट से साभार.        आज का बंद एक एतिहासिक बंद रहा.देश में बंद लगभग हर वर्ष ही होते रहते हैं किन्तु आज का बंद इस बात से एक एतिहासिक बंद है कि इसमें सरकार में शामिल दल भी पूरे जोश के साथ शामिल हैं और रहे भी क्यों नहीं? क्योंकि इस बार कांग्रेस ने अपनी तानाशाही कि राजनीति को खुलकर सामने लाया है. जिसके लिए सदा से ही धीमी आवाज में कहा गया है कि कांग्रेस एक तानाशाही का शासन करने वाली पार्टी है. आज कांग्रेस का वो चेहरा सबके सामने आ गया है.

                   एक साथ तानाशाही पूर्ण रवैया अपनाते हुए कांग्रेस ने डीजल और रसोई गैस के दाम बेतहाशा बढ़ा दिए.साथ ही इस बात पर यदि सरकार गिरती है तो उसके विदेशियों को लाभ पहुंचाने के गुप्त मनसूबे को पूरा करने में कोई बाधा ना आये इसलिए इसका फैसला भी साथ में ही जाहिर कर दिया.

                   यदि सिर्फ गैस के बढे दामो कि है बात कि जाए तो हमने पिछली सभी सरकारों के वार्षिक आम बजट में देखा है कि जब गैस के दाम में चंद रुपयों कि वृद्धि होती थी तो वित्त मंत्री जी देश कि सभी गृहिणियों से उस मूल्य वृद्धि के लिए क्षमा माँगते हुए दिखते थे. किन्तु क्या आज रसकार के पास कोई उपाय ही नहीं रहा जों इनको घरेलु इंधन के दामो में इस तरह बेतहाशा वर्द्धि को अनुमति देना पड़ी. क्या इसके पहले आवश्यक नहीं था कि सरकार अपने अन्य मद के खर्चों को कम करती. एक जानकारी के मुताबिक़ सांसद नवीन जिंदल ने के वर्ष में ९०० से अधिक गैस सिलेंडरों का उपयोग किया.

क्या आवश्यक नहीं था कि पहले इस तरह कि विसंगति को खत्म किया जाता? क्या आवश्यक नहीं था कि एक से अधिक कनेक्शन ले कर घरेलु गैस इंधन के दुरपयोग करने वालों पर रोक के लिए प्रभावी कदम उठाये जाते.

                   साफ़ जाहिर होता है कि कांग्रेस देश कि जनता कि जरा भी हितैषी नहीं है और इसके विदेशी व्यापारियों कि मदत के लिए बार बार पहल करने से मालुम होता है कि यह विदेशियों के इशारे पर कार्य कर रही है.

                    जब मै पोल खोलने कि बात करता हूँ तो इसका सीधा सा मतलब है कि कांग्रेस में शामिल लगभग सभी दल अपने आर्थिक लाभ के कारण ही उसके साथ जुड़े हैं इसका धर्मनिरपेक्षता और कांग्रेस कि नीतियों जैसी बातों से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है. आज भी एक तरफ सब जनहित कि बात को लेकर सड़क पर खड़े हैं किन्तु जब बात आती है समर्थन वापसी कि तो सब गिरगिट कि तरह रंग बदलते नजर आते हैं. साफ़ बात है कि यूपीए एक अलोकतांत्रिक गठबंधन के जरिये देश में शासन कर रहा है.इससे एक बात और भी साफ़ होती है कि मायावती और शरद पवार को सीबीआई से कितना खतरा नजर आ रहा है कि एक विशाल जनहित के मुद्दे पर भी वे खामोश ही नजर आ रहे है या कि कांग्रेस के तलुए चाटते.

                        देश कि जनता को इस बात को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए. और फिर चुनाव आज हों या कि २०१४ में यदि उन्होंने ऐसे लोगों को सबक नहीं सिखाया तो जन विरोधी गठबंधन देश कि जनता को विदेशियों का गुलाम बनाने में कोई कसर नहीं छोडेगा.



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55 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

MAHIMA SHREE के द्वारा
13/10/2012

आदरणीय अशोक सर , सादर नस्कार वाकई में यूपीए गटबंधन को धर्मनिरपेक्षता और जनहित दोनों से कोई लेना देना नहीं सब खाने और पचाने के लिए एक साथ है / इन सभी दलों में जिसको भ लगता है उसे कम खाने को मिल रहा है वो बस विरोध जताता है पर मतलब सबका एक ही अपना उल्लू सीधा करना ….. और आम जन को ये बात समझ में आई है / आपका आलेख सभी भारतियों की बात कह रहा है …. बहुत २ बधाई आपको

    akraktale के द्वारा
    15/10/2012

    महिमा जी सादर, सही कहा आपने यह सब जनता को छलने के लिए किया जाने वाला नाटक मात्र है. प्रतिक्रिया के लिये आपका आभार.

ajay kumar pandey के द्वारा
12/10/2012

आदरणीय रक्ताले जी आप मेरी हर पोस्ट पर अपनी राय देते रहे हैं आपकी हर राय मार्गदर्शक होती है बहरहाल आपने मेरे लेखन में कमियां बताई इसका धन्यवाद लेखन भी सार्थक लगा आगे से में अपने आलेखों को रुचिकर बनाने की कोशिश जरुर करूँगा आपका आभार जो आपने मेरे इस ब्लॉग पर अपनी राय दी मुझे आपका आलेख अच्छा लगा धन्यवाद अजय कुमार पाण्डेय

    akraktale के द्वारा
    12/10/2012

    अजय जी            मेरे सुझाव आपके हित के लिए ही हैं. इश्वर करे आप इन सुझावों पर अमल करके सर्व श्रेष्ठ बलोगेर बने.मुझे अति प्रसन्नता होगी. शुभकामनाएं.

sinsera के द्वारा
12/10/2012

मान्यवर अशोक जी, नमस्कार, आपके लेख से पूरी तरह सहमत….

    akraktale के द्वारा
    12/10/2012

    आदरेया सरिता जी                   सादर,आपकी सहमति के लिए हार्दिक आभार. 

yogi sarswat के द्वारा
12/10/2012

जब मै पोल खोलने कि बात करता हूँ तो इसका सीधा सा मतलब है कि कांग्रेस में शामिल लगभग सभी दल अपने आर्थिक लाभ के कारण ही उसके साथ जुड़े हैं इसका धर्मनिरपेक्षता और कांग्रेस कि नीतियों जैसी बातों से दूर दूर तक कोई लेना देना नहीं है. आज भी एक तरफ सब जनहित कि बात को लेकर सड़क पर खड़े हैं किन्तु जब बात आती है समर्थन वापसी कि तो सब गिरगिट कि तरह रंग बदलते नजर आते हैं. साफ़ बात है कि यूपीए एक अलोकतांत्रिक गठबंधन के जरिये देश में शासन कर रहा है.इससे एक बात और भी साफ़ होती है कि मायावती और शरद पवार को सीबीआई से कितना खतरा नजर आ रहा है कि एक विशाल जनहित के मुद्दे पर भी वे खामोश ही नजर आ रहे है या कि कांग्रेस के तलुए चाटते. आज तो सरकार के हर कदम पर सरकार की पोल खुलती नज़र आ रही है ! आपने ये लेख सितम्बर में लिखा है किन्तु ये आज भी उतना ही सटीक बैठता है जितना की पहले , देर से ब्लॉग पर आने के लिए क्षमा चाहूँगा रक्ताले जी !

    akraktale के द्वारा
    12/10/2012

    आदरणीय योगी जी                           सादर, देर से सही आपने वक्त निकाल कर प्रतिक्रया दी धन्यवाद. यह आलेख जब तक दोगले नेताओं के कारण सरकार टिकी रहेगी तब तक अपने आप को सिद्ध करता रहेगा. धन्यवाद.

satish3840 के द्वारा
12/10/2012

नमस्कार अशोक जी / देश में सत्ता परिवर्तन जरुरी हें

    akraktale के द्वारा
    12/10/2012

    आदरणीय सतीश जी                   सादर, आपके मन कि भावना आज पूरे देश के मन में भी देखी जा रही है किन्तु यह परिवर्तन किस तरह से हो जब संसद में दोहरे चरित्र वाले नेता देश को धोखा दे रहे हैं और इस अन्यायी सरकार का समर्थन कर रहे हैं.धन्यवाद.

D33P के द्वारा
11/10/2012

आज तो सरकार के हर कदम पर सरकार की पोल खुलती नज़र आ रही है

    akraktale के द्वारा
    12/10/2012

    आदरेया दीप्ति जी                  सादर, सच है सरकार तो पूरी तरह से बेनकाब हो चुकी है किन्तु कुछ अन्य दल के नेताओं के दोगले चरित्र का भी सामने आना इस पोल खोल का मकसद है और आप समझ सकती हैं वे कौन से नेता हैं.आभार.

meenakshi के द्वारा
11/10/2012

akraktale ji, अपने लेख के माध्यम से देश के कर्णधारों की सही पोल खोलने का काम किया है | बहुत-२ शुभकामनाएं ..! मीनाक्षी श्रीवास्तव

    akraktale के द्वारा
    12/10/2012

    आदरेया मीनाक्षी जी                    सादर, आपकी सहमतिपूर्ण प्रतिक्रया के लिए धन्यवाद.

seemakanwal के द्वारा
10/10/2012

आदरणीय अशोक जी सब कुशल -मंगल है न .बहुत दिन हो गये आप ब्लाग पर दिखे नहीं .

    akraktale के द्वारा
    12/10/2012

    आदरेया सीमा जी                   सादर, पिछले पखवाड़े में स्वास्थ कि समस्या के कारण मै मंच को वक्त नहीं दे सका किन्तु अब मै पूर्ण स्वस्थ हूँ और अपनी सक्रियता बनाए रखने के लिए प्रयासरत हूँ. आप के स्नेह के लिए हार्दिक आभार.

suman dubey के द्वारा
09/10/2012

अशोक भाई ,नमस्कार पोल तो सबकी खुली है फिर भी हम कुछ नही कर पाते क्योकि जब चुनाव आता है तो हमे भी अपनी जाती धर्म भाषा स्वार्थ सब दिखने लगता है जो नेता के लिए चुनावी मुद्दा बन जाता है काश की देशहित में सब भूलकर हम एक हो जाते तो इनकी राजनीती खत्म हो जाती ये तो आज भी फूट डालो राज करो का सिधांत अपनाये है ,

    akraktale के द्वारा
    12/10/2012

    सुमन जी             सादर नमस्कार, सत्य कहा आपने जनता हमेशा चुनाव के वक्त नेताओं के बहकावे में आकर हकीकत को भूल जाती है और फिर पांच वर्ष तक पछताती है. बहनजी आपने नयी जगह शिफ्ट होने पर पुनः मंच पर दस्तक अवश्य दी है किन्तु आपकी सक्रियता कुछ कम ही दिख रही है.आपने वक्त निकाल कर प्रतिक्रया दी इसके लिए आपका हार्दिक आभार.

drbhupendra के द्वारा
09/10/2012

बहुत दिन हो गया अशोक जी मंच पर आप दिखाई नहीं दे रहे है….

    akraktale के द्वारा
    12/10/2012

    सादर,           स्वास्थ कि समस्या कि बाधा अब नहीं है आपको भी अब शिकायत नहीं होगी. आपके इस स्नेह के लिए धन्यवाद.

akraktale के द्वारा
05/10/2012

रजनी जी सादर, देश का पैसा विदेश जाने का रास्ता साफ़ करना देशहित नहीं परहित कि निति है.समथन केलिए धन्यवाद.

yamunapathak के द्वारा
04/10/2012

आदरणीय अशोक सर नमस्कार इस आलेख को मैंने कई बार पढ़ा,राजनीति पर चर्चा नहीं कर पाती पर आपके इस ब्लॉग ने मुझे एक दिशा दी है. साभार

    akraktale के द्वारा
    05/10/2012

    यमुना जी                 सादर, आपका बार बार पढ़ना बताता है कि लेखन में कमी रह गयी है.फिरभी आपने कुछ निकाल ही लिया यह मेरे लिए सौभाग्य कि बात है.धन्यवाद अपना अमूल्य समय देने के लिए.

seemakanwal के द्वारा
02/10/2012

आदरनीय अशोक जी अब तो सरकार साल में ६ सिलेंडर ही देगी इसका अर्थ २ माह के लिए एक सिलेंडर देखिये आगे क्या होता है .

    akraktale के द्वारा
    05/10/2012

    सीमा जी                        सादर, हाँ एक ईमानदार उपभोक्ता के लिये तो अवश्य ही यह परेशानी का सबब है किन्तु फर्जी नामो से कई कनेक्शन लेने वालों को क्या फर्क पडने वाला है? आज भी घरेलु गैस के सिलेंडर होटलों में उपयोग हो रहे हैं. धन्यवाद.

manoranjanthakur के द्वारा
30/09/2012

टीवी पर बहुत पहले शेखर सुमन का कार्यक्रम आता था … पोल खोल .. बस उसी की याद दोहरा दी आपने श्री ऐकले भाई बहुत बहुत बधाई

    akraktale के द्वारा
    05/10/2012

    मनोरंजन जी                  सादर, धन्यवाद.

utkarsh singh के द्वारा
28/09/2012

हिन्दुस्तान इस समय नायक – वंचन से जूझ रहा है | मुझे लगता है की इस समय हम विप्लव के कगार पर खड़े है | मुख्य-धारा का कोई भी दल इस बात को समझ नहीं पा रहा है या फिर निहित स्वार्थ उन्हें समझने से रोक रहे है | फिलहाल आज पहली जरुरत बढ़ते हुए कांग्रेसी सर्वाधिकारवाद को रोकने और नवउदारवादी आर्थिक नीतियों को भारतीय परिवेश के अनुसार नियोजित करने की है | वरना पश्चिमी विकास का यह माडल हमारी मौलिकता को ही खंडित कर देगा |

    akraktale के द्वारा
    05/10/2012

    उत्कर्ष जी               सादर, सभी का कालाधन विदेशों में पड़ा है सब चाहते हैं किसी तरह यह सफ़ेद हो जाए और उसी के लिए यह रिटेल में विदेशी धन लाने कि निति अपनाई जा रही है. कुछ लुटेरे जेल में जाने के भय के कारण चुप्पी साधे हुए हैं. जब तक इनकी चुप्पी समर्थन करेगी देश बिकता रहेगा.धन्यवाद.

rajanidurgesh के द्वारा
26/09/2012

अशोकजी , नमस्कार सही है, ऍफ़ डी आइ के माध्यम से गुलाम बनाने की तयारी चल रही है.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
24/09/2012

आज भी एक तरफ सब जनहित कि बात को लेकर सड़क पर खड़े हैं किन्तु जब बात आती है समर्थन वापसी कि तो सब गिरगिट कि तरह रंग बदलते नजर आते हैं. साफ़ बात है कि यूपीए एक अलोकतांत्रिक गठबंधन के जरिये देश में शासन कर रहा है. प्रिय अशोक भाई तभी तो हमने वो कहावत पढ़ी थी न ..चोर चोर मौसेरे भाई सब मुद्दे पर अलग होते हुए भी एक उनके बीच का भ्रष्टाचार का प्यारा रिश्ता है सब को जोड़ देता है ….. सुन्दर आलेख भ्रमर ५

    akraktale के द्वारा
    05/10/2012

    आदरणीय भ्रमर जी                   सादर, चोर चोर मोसेरे भाई एकदम सही है किन्तु एक कि चाबी दूसरे के हाथ में है. इसलिए ये नेता नहीं चाबी के गुड्डे गुडिया हो गये हैं. धन्यवाद.

ANAND PRAVIN के द्वारा
23/09/2012

आदरणीय अशोक सर, सादर प्रणाम आज की वर्तमान राजनीती अवसरवाद पर चलती है और मुलायम और ममता जैसे नेताओं को ऐसा मौक़ा मिले और वह उसे पूरी तरह से ना भुनाय तो फिर उनके पुरे राजनीतिक जीवन के नाम पर कलंक है…….. बस सही चीज का सही दाम भी होता है समर्थन तो यह चुनाव से पहले वापस लेंगे ही और वो भी बिना सर पैर के मुद्दे पर पर अभी नहीं ………….

    akraktale के द्वारा
    05/10/2012

    प्रिय आनंद जी                   सादर, सही कहा अवसरवादी मौका मिलते ही हाथ खिन्च लेंगे.धन्यवाद.

shashibhushan1959 के द्वारा
22/09/2012

आदरणीय अशोक जी, सादर ! इस बंद ने और सरकार को समर्थन के मुद्दे ने इन सभी अवसरवादी नेताओं खासकर मायावती और मुलायम के चेहरों पर चढ़े मुखौटों को उतारकर उनका वीभत्स रूप सामने ला दिया है ! सच कहा जाय तो ये सब राजनीतिज्ञ नहीं बल्कि पाखंडी हैं ! ड्रामेबाज हैं ! जोकर हैं ! सादर !

    akraktale के द्वारा
    05/10/2012

    आदरणीय शशि जी                         सादर, सच कहा ये अवसरवादी या सीबीआई से भयाक्रांत लुटेरे हैं.इन्हें जनहित से क्या लेना देना. विचारशील प्रतिक्रया के लिए आपको धन्यवाद.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
22/09/2012

आदरणीय अशोक जी, सादर अभिवादन. ये न सुधरेंगे जनता का खून पी रहे हैं. अधिकांश जनता भी इन जैसे लोगों के साथ है अपनी स्वार्थ पूर्ति हेतु, अन्यथा इतनी सीटें कैसे पा गए. बधाई. स्नेह बनाये रखिये.

    akraktale के द्वारा
    22/09/2012

    आदरणीय प्रदीप जी                       सादर, ये भी बहुत ही मुद्दे कि बात कही है आपने बहुत सी जनता अपने गलत कामो में इनके आश्रय के कारण इनके साथ जुडी रहती है. वरना दोहरे चरित्र वाले को तो कोई भी अच्छा नहीं कहेगा. लोकतंत्र में ऐसे नेता कलंक हैं.आभार.

vikramjitsingh के द्वारा
21/09/2012

आदरणीय अशोक जी…..सादर…. पोल तो कब की खुल चुकी है……हर जागरूक नागरिक इन ‘चोरों’ की चालों को समझ चुका है……. एक बार फिर से याद दिलाने के लिए आप का हार्दिक धन्यवाद…..

    akraktale के द्वारा
    22/09/2012

    विक्रमजीत जी                  सादर, धन्यवाद.शिंदे जी कहते हैं जनता सब भूल जाती है इसलिए याद दिलाना भी जरूरी है. 

bhanuprakashsharma के द्वारा
21/09/2012

आदरणीय अशोक जी। मैं आपकी बात से सहमत हूं। किसी भी दल को महंगाई से वास्ता नहीं है, वे तो कांग्रेस की कुनीति की आड़ में हल्ला मचाकर अपनी ताक को भांप रहे हैं। सरकार में शामिल दल तो यह देख रहे हैं कि सरकार के संकट में आने पर वे समर्थन के नाम पर क्या सौदेबाजी करें। यदि महंगाई पर सरकार और उसमें शामिल दलों के साथ ही विपक्षी दल वास्तव में देश के प्रति जागरूक होते, तो सबसे पहले वे अपने खर्च पर अंकुश लगाते। पर ऐसा प्रयास कोई नहीं करेगा। सभी को वोट के साथ ही नोट भी चाहिएं। 

    akraktale के द्वारा
    22/09/2012

    आदरणीय भानुप्रकाश जी                            सादर, यही बात मैंने कही है सब अपने आर्थिक लाभ कि खातिर कांग्रेस से जुड़े हैं किसी को देश से लेना देना नहीं है. आपकी सहमतिपूर्ण प्रतिक्रया के लिए धन्यवाद.

annurag sharma(Administrator) के द्वारा
21/09/2012

भाई साहब ,बिलकुल सत्य लिखा है आपने ,गठबंधन नहीं पर जब पूर्ण बहुमत होता है तो तानाशाही का नजारा भी देखने को , जैसे मायाबती शाशन मे ,और अब देखना और शाशन मे ,,

    akraktale के द्वारा
    22/09/2012

    आदरणीय              सादर, कांग्रेस को अंग्रेजो कि निति बहुत ही रास आती है और वह उसी पर काम कर रही है और हमारे देश में नेताओं कि मानसिकता वही गुलामों वाली है. तब अंग्रेजों ने राजाओं को खरीद लिया था आज के नेता लोकतंत्र के राजा ही तो हैं.ये भी बिकते चले जा रहे हैं. जब तक ऐसे बिकाऊ लोग होंगे तो निरंकुशता तो बनी ही रहेगी.आभार.

jlsingh के द्वारा
21/09/2012

आदरणीय अशोक भाई जी, नमस्कार! आपने तो पोले खोली ही है …. अंत में मुलायम सिंह और प्रकाश करत ने अपनी बात खोलकर रख ही दी. यहत राजनीतिक पार्टियों का अपना अपना शौर्य प्रदर्शन का तरीका था. पी. चिन्दरम की मुस्कराहट बतला रही थी की कुछ भी कर लो हम तरीका जानते हैं…

    akraktale के द्वारा
    22/09/2012

    आदरणीय जवाहर जी भाई                           सादर, बस यही बात मैंने कही है कि यह सिर्फ आर्थिक लाभ के कारण कांग्रेस से जुड़े हैं वरना सबके अपने अलग ही मनसूबे है.और अब यह तो जनता पर निर्भर करता है कि वह इन लोगों को सबक सिखाये. दोहरे चरित्र वालों से जनता कभी  भी कोई अच्छी उम्मीद कर ही नहीं सकती. 

kpsinghorai के द्वारा
21/09/2012

रक्तले जी आपने सही लिखा है कि सरकार का काम अपने देश की जनता के भले के बारे में सोचना होता है न कि यह कि विदेशी कैसे उपकृत हैं। बात केवल चुनावों की नहीं है बल्कि जनमानस को भी अब इसके प्रति अपनी बात स्पष्ट रूप से कहने के लिए आगे आना चाहिए और लोकतंत्र में चुनाव ही मुख्य हैं। फिर भी लोगों को अपने विरोध के लिए केवल यही बंद जैसे तरीकों से पल्ला झाड़ना चाहिए चूंकि इनसे भी नुकसान इन जैसे राजनीतिज्ञों का नहीं होता बल्कि केवल पावर-पावर का खेल खेलने के लिए होता है। जनमानस की स्वाभाविक प्रतिक्रिया आना जरूरी है। बेहद सुंदर विवेचन….

    akraktale के द्वारा
    22/09/2012

    आदरणीय सिंह साहब                      सादर, बिलकुल सही कहा है आपने इससे आम जनता का ही नुक्सान होता है. और अब हम देख भी रहे हैं कि सरकार को इस बंद का कोई असर भी नहीं हुआ ना ही वे दल दूसरे दिन सरकार के विरुद्ध खड़े दिखे.फिर जनता को इन्होने क्यों नुक्सान पहुंचाया? जनता को अब सचमुच जाग्रत होना ही चाहिए ताकि ऐसे जनविरोधी लोग सत्ता से दूर किये जा सकें.आभार.

omdikshit के द्वारा
20/09/2012

अशोक जी, सादर नमस्कार. महंगाई या पेट्रोल,डीजल ,गैस हो अथवा अन्य कोई ,वस्तु , क्या जनता सरकार ,भाजपा सरकार में नहीं बढ़ी थी?इसके लिए केवल कांग्रेस ही दोषी क्यों,उनके सहयोगी क्यों नहीं ? सरकार की यही गलती है कि धीरे -धीरे ,बढ़ाना चाहिए था.सबसे बड़े दुःख की बात है कि ,मनमाना दाम वसूलने वाले ,उद्योग-पति,व्यापारी ,जो अधिकतर भाजपा से सम्बद्ध हैं,भी इसमें शामिल हैं.अटल जी जैसे विद्वान् नेता ने,सौ दिन में महंगाई समाप्त करने का वादा किया था,क्या हश्र हुआ,किसी से छुपा नहीं है.मैं कांग्रेसी नहीं हूँ,लेकिन इस विषय पर ,निष्पक्ष विवेचन करने और महंगाई कम करने हेतु ठोस उपाय सुझाने की भी आवश्यकता है.,क्योंकि मैं भी त्रस्त हूँ.

    akraktale के द्वारा
    22/09/2012

    आदरणीय दीक्षित साहब                  सादर नमस्कार, एक आप और मै नहीं सारा देश ही आर्थिक स्थिति से जूझने लगा है. प्रधानमन्त्री जी का बेबाकी से यह कह देना कि गरीब व्यक्ति वर्ष भर में छः से अधिक सिलेंडर नहीं उपयोग करता. वे इसके आंकड़े भी बता पाते तो अच्छा होता किन्तु असत्य के आंकड़े लाये कहाँ से! मैंने कहीं इस बात को नहीं कहा है कि कांग्रेस के दौर में महंगाई बढ़ी है तो दूसरे दल कि सरकार बनेगी तो महंगाई कम हो जायेगी. जिस बात पर आप सहमत है कि नीतियां सुधारना चाहिए जिससे कि गरीब और माध्यम वर्ग पर बोझ कम हो.किन्तु इस सरकार ने ऐसे कोई कदम नहीं उठाये हैं कांग्रेस को सत्ता से इसलिए भी हट जाना चाहिए कि लगातार इनके विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामले सामने आ रहे हैं फिर निष्पक्ष फैसले कैसे होंगे? आम आदमी कि चिंता जाहिर करने के लिए आपका आभार.

bharodiya के द्वारा
20/09/2012

आज कल के दिन ही ऐतिहासिक घटनाओं के दिन हैं । आज की तारिख में भारत देश को बेचा जा रहा है । एक विदेशी महिला के आगे भारत के १२० करोड की जनता नत मस्तक है । समजो आज एक ही विदेशी महिला पूरे भारत को हिला रही है तो एफ.डी.आई के जरिये और विदेशी आ जायेंगे तो कितनी तबाही होगी । विमान सेवा भी बेची जा रही है । लडाई के समय किस के पक्ष में वो विमान उडायेंगे ।

nishamittal के द्वारा
20/09/2012

और अब देखिये जनता के गाढे पसीने की कमाई का पैसा सरकार अन्य दलों को चारा दाल कर खरीदने में लगाएगी.

    akraktale के द्वारा
    22/09/2012

    निशा जी             सादर, देश कि जनता को आर्थिक मुसीबत में धकेलकर आज भी डंके कि चोट पर यह कहना कि हमारा कुछ नहीं बिगडने वाला, इस बात को साफ़ जाहिर करता है कि अंदर ही अंदर लेनदेन का खेल हो चुका है. आभार.

mataprasad के द्वारा
20/09/2012

नमस्कार सर जी , इन्हें तो सबक सीखाना ही पड़ेगा……….. सबसे बड़ी समस्या यह है की हमारा पढ़ा -लिखा जो तबका है,वो वोटिंग से दूर रहता है, और जो गरीब या अनपढ़ है वो अधिक से अधिक संख्या में वोटिंग करते है , क्यों की ये वोटिंग के लिए लाइन में खड़े हो सकते है , अपना समय अमूल्य वोटिंग के लिए दे सकते है | किन्तु हमारा, जिसे हम पढ़ा लिखा समाज कहते है , वो बहुत ही कम vote करता है | गरीब या अनपढ़ थोड़े से लाभ से अपना वोट किसी भरष्ट को वोट कर देता है , भविष्य में वो क्या करेगा ? इसका जरा भी विचार नही करता | ऐसे me 2014 तक गरीबो और किसानो को सरकार ने लाभान्वित किया तो…………………………………. देश के भविष्य पर कैसा प्रभाव पड़ेगा, आप सोच सकते है | ऐसे में हमारे समाज सेवियों ,या जो देश के भविष्य को लेकर वास्तव में चिंतित है उन्हें कड़ी मेहनत करनी होगी है और लोगो को ये बताना होगा क़ि यह देश उनका अपना है और अपने देश को किसी ऐसे व्यक्ति या पार्टी को na सौपे जो देश के,और देशवाशियो के अहित में कम कर रहा हो

    akraktale के द्वारा
    22/09/2012

    माता प्रसाद जी                    सादर, सच है कि आज अभिजात्य वर्ग के अधिकाँश लोग वोट नहीं करते इसके पीछे उनकी वोट ना करने कि मंशा से अधिक नियमों कि बाधाकता है. जिसमे सुधार लाना कोई भी राजनैतिक दल नहीं चाहता. धन्यवाद.


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