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पाकिस्तान से भागकर आते हिंदू: अत्याचार से पीड़ित या घुसपैठ की नई चाल?(जागरण जंक्शन फोरम)

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                    आज आजादी के ६५ वर्ष के बाद भी पाकिस्तान वहाँ के हिंदुओं को अपने देश का नागरिक मानने से ही बचने का रास्ता ढूंढता नजर आता है वहीँ हिन्दुस्तान का बहुत बड़ा मुस्लिम वर्ग अपने आपको हिन्दुस्तानी कहने में शायद शर्मिन्दा मुहसुस करता है. इस समस्या पर कभी किसी भी राजनेता का बहुत ध्यान नहीं गया.हम जमीन के टुकड़े के लिए तो कई बार लड़ चुके हैं और कई बार वार्ता कर चुके हैं किन्तु कभी भी उभयामुलकों ने जीवित इंसानों के लिए कभी चर्चा करने में रूचि नहीं दिखाई. यदि इस बात का आजादी के बाद जल्दी ही निपटारा कर दिया जाता तो आज हमारी और पाकिस्तानी हिंदुओं कि समस्याओं का समाधान शायद निकल आता. किन्तु ऐसा हुआ नहीं.

                   मै कभी समझ नहीं पाया कि हिन्दुस्तान में जों वर्ग आये दिन पाकिस्तान के झंडे ले कर उधम मचाता है जों हिन्दुस्तान के विरुद्ध हो रहे आतंकवाद में कई बार इन आतंकियों को शरण देता है. कई बार देश कि ही रोटी खाकर इसके विरुद्ध आग उगलता रहता है. क्या कारण है कि इन लोगों को इनके समाज के वरिष्ठ जनों द्वारा कभी समाज से बेदखल करने कि बात नहीं होती कभी समाज इन पर कोई जुर्माना नहीं करता कोई फतवा इनके विरुद्ध जारी नहीं होता. खैर चलो ये हमारे देश कि समस्या है और अभी तक यहाँ से कम से कम  किसी को इस बात के लिए पलायन नहीं करना पड़ा कि उस पर यहाँ किसी अन्य धर्म के लोगों द्वारा कोई जुल्म किया जाता हो.और जिन पर एक ही धर्म के होने पर भी छोटी बड़ी जात के आधार पर जुल्म हो रहे हैं वे बेचारे जाना भी चाहें तो जाएँ कहाँ.

                        बात जब पकिस्तान से आ रहे हिंदुओं कि है तो हमारी पूरी आत्मीयता उन लोगों के साथ है.वे मेहमान बनकर आयें हम स्वागत करते हैं उनका.वे यदि चाहें तो हमारी सरकार को भी आगे बढ़कर उनकी मदत करनी ही चाहिए. क्योंकि वे हताशा में यदि किसी से मदत कि उम्मीद करेंगे तो वह भारत ही है और यह गलत भी नहीं है. किन्तु वह यदि पलायन करके भारत में ही बस जाना चाहते हैं तो वह इस मुल्क के साथ ही उनके खुद के साथ भी बड़ी ज्यादती होगी.आज जैसे ही इस तरह पलायन करके हिन्दुस्तान आने वाले हिंदुओं कि संख्या में इजाफा हुआ देश में कई तरह कि चर्चाओं ने जन्म ले लिया कोई उन्हें पाकिस्तान से गुपचुप आ रहे आतंकवादियों कि तरह देख रहा है तो वहीं कोई इसे देश के लिए ख़तरा बता रहा है. इसलिए बेहतर होगा कि भारत कि सरकार पाकिस्तान पर इस बात के लिए भी दबाव बनाए कि पाकिस्तानी सरकार वहाँ के  हिंदुओं कि सुरक्षा के अतिरिक्त इंतजाम करे. मानवाधिकार और अन्य कई संगठन है जिनके सम्मुख इस बात को उठाया जाए कि इस तरह कि घटनाओं पर जब तक रोक सुनिश्चित नहीं हो जाती पाकिस्तान पर आर्थिक और अन्य प्रतिबन्ध लगाए ताकि बह अपने देश के सारे हिंदुओं कि सुरक्षा पर ध्यान देने के लिये मजबूर हो.यही इस बात का सही हल होगा. क्योंकि आज जिस तरह से देश आतंकवाद से जूझ रहा है ऐसी परिस्थिति में गलतफहमी से भी यदि कोई सम्प्रदाय इन हिंदुओं पर शक या किसी प्रतिद्वंदिता के आधार पर यदि हमला कर देगा तो वह देश के लिए बड़ी ही बदनामी का विषय होगा.और यदि पलायन कर आये हिंदू यहाँ ठीक से अपनी आजीविका नहीं प्राप्त कर पाये तो वे अब तक पाकिस्तान में मोहाजिर हैं फिर वे हिन्दुस्तान में भी मोहाजिर ही हो जायेंगे.

                         इसलिए मुझे जो उपयुक्त हल नजर आता है वह इनकी वापसी ही है. इसके लिए भारत के साथ कि विश्व के अन्य रसूखदार देश पाकिस्तान पर दबाव बनाएँ. पाठकगण आवश्यक नहीं है इससे सहमत ही हों वे अपनी निष्पक्ष राय रखें.


 



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56 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

aman kumar के द्वारा
12/10/2012

प्रवासी समस्या का बिलकुल सही हल सुझाया है आपने ! पर सरकारी तौर पर समस्या केवल वो ही मानी जाती है | जिससे कमाई हो या वोट बैंक बड़े …… यह दोनों ही नही है फिर क्यों कोई सोचेंगा ?

    akraktale के द्वारा
    12/10/2012

    अमन जी            सादर धन्यवाद. आपका कथन बिलकुल सत्य है.

yamunapathak के द्वारा
04/09/2012

आदरणीय अशोक जी नमस्कार आपकी राय सही है एक तो देश वासी स्वयं गरीबी का दंश झेल रहे हैं और जब इन sharnaarthiyon के लिए रोजगार,घर इत्यादि मुहैय्या कराने की बात आयेगी तब सरकार कौन सी योजना बनायेगी?

    akraktale के द्वारा
    05/09/2012

    यमुना जी              सादर, अवश्य ही यह देश पर भार ही होगा किन्तु उससे भी अधिक चिंता करने वाली बात यह है की यदि इसके जरिये आतंकवादी प्रवेश कर गए तो फिर उनको पकड़ पाना भी मुश्किल होगा.आपका वक्त निकाल कर प्रतिक्रया देने के लिए. आभार.

sagar के द्वारा
28/08/2012

साले गांधी नेहरु ने भारत को डुबाने में कोई कसर नहीं छोरा …..अगर १९४७ में बटवारा हिन्दू और मुसलमान के Aadhar pe huwa (muslim bahul illake muslmano ko aur hindu bahul illake hinduo ko to muslman to is desh mai गैर-kanuni dhang se rah rahe hai…. logo ko unke khilaaf awaaz utthan chaiye …muslmano ko Hindustan se nafrat hai…bande mataram e nafrat hai….to is desh me unke liye koi jagah nahi hai  वो पाकिस्तान चले jaaye…..jai hind…….. bande mataram

    akraktale के द्वारा
    28/08/2012

    सागर जी आपका आक्रोशित होना स्वाभाविक है क्योंकि आजादी के वक्त पाकिस्तान मुस्लिम राष्ट्र तो बना किन्तु हिन्दुस्तान हिंदू राष्ट्र नहीं बन पाया. नेहरू जैसे लोगों ने अपने स्वार्थ के लिए इसे कई पचडों में उलझा दिया जों आज तक नहीं सुलझे. यही कारण है कि हिंदी आज तक हमारे देश कि राष्ट्रभाषा नहीं बन पायी. काश्मीर पर पाकिस्तान नज़ारे गडाए है. मुस्लिमो कि संख्या में हिंदुओं कि अपेक्षा अधिक जनसंख्या वर्द्धि जैसे कई मुद्दे हैं. आपका अपने स्पष्ट विचार रखने के लिए धन्यवाद. कृपया लेखन में गालियों का प्रयोग ना किया करें यह कमजोर मानसिकता का परिचायक होता है. शब्दों कि कमी नहीं है जों गालियों से भी अधिक जोशीले होते हैं उनका प्रयोग करके देखें. शुक्रिया.

alkargupta1 के द्वारा
27/08/2012

अशोक जी, संभवतः पाकिस्तान से आ रहे हिन्दुओं की आड़ में कुछ घुसपेठिये भी हों जिनसे हमारी सरकार बेखबर है… यहाँ हमारे सत्तासीन राजनेताओं को कुछ भी नहीं सोचना है बस अपना वोट बैंक सुरक्षित रखना है…… अति गंभीर विषय पर लिखा है

    akraktale के द्वारा
    28/08/2012

    अलका जी           सादर नमस्कार, आपकी चिंता वाजिब है. सरकार में भ्रष्टाचार जिस तरह घुसपैठ कर गया है उससे पूरा देश चिंतित और आंदोलित है.यह अपनी कुर्सी बचाने के लिए कुछ भी कर सकते है. अपने विचार रखने के लिये आपका आभार. 

D33P के द्वारा
27/08/2012

नमस्कार अशोक जी …….वहा से आये हिन्दुओ का कहना है ,कि पाकिस्तान में हिन्दुओ के साथ भेदभाव होता है अत्याचार होता है उन्हें जबरन विवाह,अपहरण धार्मिक ,जातिगत प्रतारना सहनी पड़ती है ,यहाँ तक भारत और पाकिस्तान के बीच क्रिकेट मैच तक में अगर पाकिस्तान हार जाता है तो उनका गुस्सा भी वहा रह रहे पाकिस्तानी हिन्दू भुगतते है ! इसी के चलते हिन्दुओ ने वहा से पलायन करना शुरू किया ,बात उन पाकिस्तानी हिन्दुओ की निष्ठां की नहीं है पर उनकी आड़ में जो घुसपैठ भारत में हो रही है(और इस बात से इंकार भी नहीं किया जा सकता जिसकी प्रबल संभावना है ) उसका खामियाजा भी हमें ही भुगतना पड़ेगा ,भारत अपने आप को उदार साबित करके अपने देश का कितना उद्धार करेगा ,ये सोचने की बात है ,बंगला देश के शर्णार्थियो को अपने देश में पनाह देने का खामियाजा आज तक ये देश भुगत रहा है ,पूरी घुसपैठ कर ली है !और सही बात तो ये है जब घर में दुश्मन हो तो बाहर की क्या कहें ?

    akraktale के द्वारा
    28/08/2012

    दीप्ति जी           सादर नमस्कार, यदि वहाँ के हिंदू कह रहे हैं तो वह सच ही है.इसलिए पाकिस्तान अघोषित आतंकी राष्ट्र बन गया है. किन्तु आपके सवाल भी गम्भीर हैं. बंगलादेश के शरणार्थी और बड़ी तादाद में छुपकर घुस आये लोग देश कि सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा है.कल को यही पलायन करने वाले सुविधाओं के अभाव में देश को ब्लेक मेल भी करें तो कोई आश्चर्य नहीं होगा. इसलिए सरकार को उन्हें उनके ही मुल्क में सुरक्षा दिलाने का प्रयास करना चाहिए. आपकी विश्लेषणात्मक प्रतिक्रया के लिए धन्यवाद.

pritish1 के द्वारा
26/08/2012

भारत और पाकिस्तान को टुकड़ों मैं हममे से किसी ने नहीं बांटा बस हमने उस दर्द को सहन किया है बाँटने वाले कल भी आराम से थे आज भी आराम से हैं और सत्ता में हैं हमारे लिए नियम बनाते थे और बनाते हैं जागना हमें है एक अखंड भारत बनाने के लिए और हम एक अखंड भारत के निर्माण के लिए प्रयत्नरत है वन्दे मातरम जय हिंद जय भारत जय भारत स्वाभिमान…….!

    akraktale के द्वारा
    28/08/2012

    प्रीतीश जी              नमस्कार, पाकिस्तान हिन्दुस्तान के बंटवारे कि याद तो सदा ही बैचेन करने वाली रही है. किन्तु आज के हालात बहुत ही भिन्न हैं.आपके प्रयत्न के लिए शुभकामनाएं.

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
26/08/2012

मान्य भाई ए. रक्ताले जी, सादर नमस्कार !………अब तो ऐसा प्रतीत होने लगा है कि यह बिलकुल घुसपैठ की कोई नई चाल ही है ! सत्तासीन दल इस समझ न समझने का नाटक कर रहा है | इसकी चंता तो केवल वोट बैंक को सुरक्षित रखने की है ! आलेख छोटा पर असरदार है ! हार्दिक बधाई !! पुनश्च !!

    akraktale के द्वारा
    28/08/2012

    आदरणीय आचार्य जी सादर नमस्कार, आपकी शंका निराधार नहीं है क्योंकि अभी तक इसी तरह का रुख सरकार का हमने देखा है. अपनी विचार पूर्ण प्रतिक्रया देने के लिए आपका आभार.

Rahul Nigam के द्वारा
25/08/2012

रक्ताले जी, आपसे पूर्णतयः सहमत हूँ. आपकी बेबाक राय विचारणीय है. वैसे जब कोई पाकिस्तान से आता है तो वो हिन्दू या मुस्लिम नहीं अपितु पाकिस्तानी होता है. पाकिस्तानियों का हिन्दू के रूप में इस देश घुसना इस बात को कैसे साबित करेगा कि पाकिस्तान से आने वाला वो हिन्दू अपने वतन पाकिस्तान के प्रति वफादार नहीं होगा. पाकिस्तान अपने नागरिको (हिन्दुओ) के पलायन से कतई चिंतित नहीं है, क्या ये एक प्रकार की मूक सहमति नहीं है. पाकिस्तान से आने वाले हिन्दू अभी लंबे वीजा पर आ रहे है जो कि कानूनन गलत नहीं है. फिर भी इतनी बड़ी संख्या में यकायक आना और निरंतर आते रहने को नजरअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए. इस मुद्दे को विश्व स्तर पर उठाया जाना चाहिए. रहा प्रश्न उनके लौटने का तो ये नियमतः ही लौटेंगे पर विश्व स्तर पर पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा करना आवश्यक है. इस देश की रक्षा और इस प्रकार की समस्याओं के निदान के लिए धर्म निरपेक्षता की संवैधानिक परिभाषा ज़रूरी है, जो कि अभी तक संविधान में कहीं परिभाषित नहीं है.

    bharodiya के द्वारा
    26/08/2012

    क्या बात कही भाई । पाकिस्तान से आया सरदार, जो मुस्लिमो का तरफदार भी है, वो भारत का प्रधानमंत्री बन जाता है, उस की निष्ठा किधर होगी ? जरूरत पडी तो पाक से लड पायेगा कभी ? ईटली से आई सोनिया, क्रिष्चन है, उस की निष्ठा किधर है, भारत या ईटली ? पूरी दुनिया के दंभी धर्म निर्पेक्ष लोगों को हिन्दु ही अखरते हैं सब जगह । मुस्लिम की बात आती है तो दुम दबा के भाग खडे होते हैं । भारत में रहे मुस्लिमो की वफादारी पाक के साथ है किसी को दिखाई नही देता ।

    Rahul Nigam के द्वारा
    26/08/2012

    भरोदिया जी, सादर, मजहबी सोच के अनुसार आप बिलकुल दुरुस्त है पर जब हम एक देश की निगाह से सोचते है तो हमारी कार्य शैली और विचारधारा में परिवर्तन हो जाता है. अपने घर किसी विदेशी बहू, दामाद, पत्नी अथवा पति को लाना अथवा किन्ही कारणों से किसी का इस देश में आकर बस जाना ये एक भिन्न स्थिति है. पर यहाँ समस्या “एक साथ पलायन” वाली है जिसमे षड़यंत्र की बू आ रही है. अतएव रक्ताले जी और हमारी आशंका निराधार नहीं है.

    bharodiya के द्वारा
    26/08/2012

    राहुलभाई आप को षड़यंत्र की बू बहुत छोटी जगह से आ रही है । नाक को तेज करो । बहुत बडी बू आयेगी । भारत को भुल जाओ । ग्लोबल राजनीतिमें भारत कहीं भी नही है । भारत की जो भी वेल्यु बची है वो सिर्फ ईकोनोमी के कारण । क्यों की यहा मजदूरों की बस्ती है । आज पूरी दुनिया पर कौन सी प्रजा राज करना चाहती है वो ही महत्वपूर्ण है । मुस्लीम प्रजा चाहती है दुनिया में सिर्फ ईस्लाम का राज हो, पूरी प्रुथ्वी ही उन का देश है । यहुदी और क्रिश्चयन आज हकिकत में प्रुथ्वी पर राज कर रहे हैं, अपनी शातिर बुध्धि से, ईकोनोमी के चक्कर मे फसा कर । सब देशों के नेताओं को गुलाम बना दिया है । भारत में रहे ईसाई भी भारत के नही विश्व सरकार के नागरिक है । हिन्दुओं को भी विश्व नागरिक बनना पडेगा । विश्व के और कोने में बसे हिन्दुओं को अपनाना होगा ।

    akraktale के द्वारा
    28/08/2012

    आदरणीय निगम साहब, भाई भरोदिया जी                              हम सभी इस बात पर सहमत नजर आ रहे हैं कि कोई इस पलायन कि आड में बड़ी आतंकी घटना को अंजाम भी दे सकता है.हम यदि सिर्फ धार्मिक रूप से सोचें तो हम जब मुस्लिमो के दुश्मन नहीं हैं तो फिर हिंदुओं कि भला क्यों दुश्मन होंगे. किन्तु सोचें कि यह परिस्थिति सिर्फ पाकिस्तान कि नहीं हमारे आसपास के सभी मुल्कों में यही हालात हैं कल को भारत में पलायन कर आने वालों से बड़ी समस्या भी कड़ी हो सकती है. आप ने अपनी राय रखी, आप लोगों का तहे दिल से शुक्रिया. 

Punita Jain के द्वारा
25/08/2012

आदरणीय अशोक जी, अगर हम इन पीड़ित हिन्दुओं को वापिस भेजने की बात करते हैं तो कुछ सवाल उठते हैं – १) बांग्लादेशी घुसपैठियों के प्रति भारत में उदारता दिखाई गयी, तो फिर इन पीड़ित हिन्दुओं के प्रति इतनी कठोरता क्यों? २) भारत में लगभग ३ करोड़ बांग्लादेशी घुसपैठिये घुस चुके हैं, इन पीड़ित हिन्दुओं की संख्या तो बहुत कम है, यदि वहां से सभी हिन्दू (लगभग 30 लाख) भी आ जाएँ तो भी इन घुसपैठियों से बहुत कम होंगे | सुरक्षा का खतरा तो इन बांग्लादेशी घुसपैठियों से भी है | ३) पाकिस्तान से आये आतंकवादी भारत में अपने मंसूबों में इसलिए कामयाब होते हैं क्योंकि उन्हें यहाँ के स्थानीय निवासी पनाह देते हैं, और वोट बैंक की नीति के कारण इन स्थानीय लोगों के विरुद्ध कार्यवाही नहीं होती | ४) विश्व की कुल जनसँख्या में अल्पसंख्यक हो गए हिन्दुओं की मुसीबत में सहायता करना क्या हमारा फ़र्ज़ नहीं बनता?

    akraktale के द्वारा
    28/08/2012

    पुनीता जी              सादर मै  आपकी भावना को समझ पा रहा हूँ. भारत हमेशा से उदार रहा है चिंता इसी बात कि है कहीं हिंदुओं के भेस में आतंकी ना आजाये. यहाँ के स्थानीय लोग जों आतंकियों को पनाह देते हैं उस पर मैंने पहले भी लिखा है. आपका सद्भावनापूर्ण पक्ष भी उत्तम है.धन्यवाद.

satish3840 के द्वारा
25/08/2012

अशोक जी बात आपकी सही हें / कहीं ऐसा न हो ये घुसपैठ की नई चाल हो / वेसे ही देश बँगला देश के लोगों के देश में आ जाने असुरक्षित महसूस कर रहा हें / विदेशी कोई भी हो उसे देश की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ नहीं करने दिया जा सकता /

    akraktale के द्वारा
    25/08/2012

    आदरणीय सतीश जी सादर नमस्कार, सच कहा है आपने देश कि सुरक्षा सर्वोपरि है. आतंकी घटनाओं से आम जन पहले से ही आतंकित है. अपने विचार रखने के लिये आपका बहुत बहुत शुक्रिया.

Chandan rai के द्वारा
25/08/2012

अशोक साहब , भारत और विश्व मानवधिकार का पाकिस्तान में हो रहे हिन्दुओं के लिए प्रतिकार न करना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है ,और यही स्थिति पलायन के बाद भी है , इन्हें घुसपैठिये कहना अनुचित होगा , ये तो वंहा कमजोर होते अल्प्शंख्यक है ! एक नितांत विषय पर सुन्दर लेखन !

    akraktale के द्वारा
    25/08/2012

    भाई चन्दन जी                     सादर, यही तो पेशोपेश कि स्थिति है कि यह वास्तव में सताए हुए हिंदू है या फिर पकिस्तान कि कोई चाल. अपने विचार रखने के लिए आपका हार्दिक अभिनन्दन.

Ramesh Bajpai के द्वारा
25/08/2012

प्रिय श्री अशोक जी बहुत ही ज्वलंत मुद्दे पर विचारणीय चितन | मंथन होना चाहिए | सभी विकल्पों को ध्यान में रखते हुए हल निकलेगा तो अच्छा होगा | बहुत अच्छी प्रस्तुति |

    akraktale के द्वारा
    25/08/2012

    आदरणीय बाजपेयी साहब                सादर नमस्कार, बिलकुल सभी ने अपनी राय रखनी ही चाहिए और एक उत्तम विचार उभरना चाहिए. क्योंकि विषय जटिल है. आपका हार्दिक आभार.

DHARAMSINGH के द्वारा
24/08/2012

 आजादी ही कब आई है केवल सता  बदली है 1944 मे जेल से बाहर आने पर गान्धी ने  डोमीनियन स्टेट की पैरवी की थी बदले मे मैडलीन सलैड मिली  पहले विदेसी अंग्रेज थे अब देसी अग्रेज हैं  जार्ज नेहरू व मौलाना गान्धी हिन्दुओ का भला क्यो सोचते गदी तो मिल ही गईथी  लाथ मे औरत भी मिली गान्धी को मैडलीन सलैड जिसके संग नंगा सोता था  नेहरू को लेडी माउन्ट बैटन ईसी लिए तो 1949 मे क्राउन के वफादार रहने के  लिए लन्दन पैक्ट पर दसतक किये थे   पता नहीं  सता मिलने पर इतने हिन्दू गदार क्यो बने

    akraktale के द्वारा
    25/08/2012

    आदरणीय धरमसिंह जी                               सादर, पहले विदेसी अंग्रेज थे अब देसी अग्रेज हैं बिलकुल सच कहा है आपने. हर पहलू विचारणीय है. आभार.

rekhafbd के द्वारा
24/08/2012

आदरणीय अशोक जी ,विचारणीय आलेख ,उनकी वापिसी ही इस समस्या का हल है ,मै आपसे पूर्णतया सहमत हूँ

    akraktale के द्वारा
    24/08/2012

    रेखा जी           सादर नमस्कार, सहमति दर्शाने का बहुत बहुत शुक्रिया. 

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
24/08/2012

रक्तलेजी, मेरे विचार से कोई भी आपकी सोच से असहमत नहीं होगा क्योंकि मोजाहिर हुए लोग भारत आकर फिर मोजाहिरों की स्थिति में आ गए तब यह न केवल देश बल्कि उनके लिए भी पीड़ादायक होगा, इसलिए सबसे उपयुक्त उपाय यही है कि पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति को लेकर भारत सरकार दबाव बनाए और उन्हें वहां पर सुरक्षित माहौल मिल सके। साभार…

    akraktale के द्वारा
    24/08/2012

    आदरणीय सिंग साहब                            सादर नमस्कार, आपका आलेख के मर्म को समझने और सहमति दर्शाने का शुक्रिया. अवश्य ही सरकार को इस ओर प्रयास कि सख्त आवश्यकता है.

bharodiya के द्वारा
24/08/2012

अशोकभाई नमस्कार मानवाधिकार आयोग हिन्दु के लिए नही है ये बात लिख लो । पाक से आये कुछ हिन्दु के साथ हिन्दु के भेस में कोइ आतंकवादी आ जाते हैं वो कोइ बडी समस्या नही है । भारतमें पहले से ही बहुत से आतंकी मौजुद है, कोइ फरक नही पडेगा । हिदु को बचाना जरूरी है ।

    akraktale के द्वारा
    24/08/2012

    भरोडिया जी भाई नमस्कार, आपका कहना भी सही है, यहाँ लगातार हो रही देशद्रोह कि घटनाएं भी यही साबित करती है. कुछ को सरकार ने मेहमान बना कर रखा है ताकि मौका मिलते ही वे उस काम को अंजाम दे सकें जिसको अंजाम देने में वे चूक गये थे. परिस्थितियों के अनुसार आपकी सही टिपण्णी के लिए आभार.

    Punita Jain के द्वारा
    25/08/2012

    भरोदिया जी के विचारों से पूरी तरह सहमत |

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
24/08/2012

maanya bhaai raktale , sabhivadan !………is mudde par aap se main bilkul sahmat hoon ! aalekh ke liye badhai !!

    akraktale के द्वारा
    24/08/2012

    आचार्य जी              सादर, आपका विश्वास अवश्य ही मेरे मनोबल में वृद्धिकारक होगा. धन्यवाद.

yogi sarswat के द्वारा
24/08/2012

आदरणीय श्री रक्ताले साब नमस्कार ! आपका लेखन पढ़ा ! व्यवस्थित किन्तु छोटा लगा ! मुझे लगता है आपको और विस्तृत करना चाहिए था ! रक्ताले जी , अगर आज के विश्व की बात करी जाये तो शायद सबसे ज्यादा निरीह प्राणी इस धरती पर हिन्दू ही होगा ! एक नेपाल था , वो भी धर्म निरपेक्षता के जाल में फस गया ! पाकिस्तान में हिन्दू , किसी बनिए के दूकान का माल हुआ पड़ा है ! वहां की तो चलो , अलग धरती है , हम कुछ नहीं कर सकते , वार्ता के अलावा ! लेकिन अपनी धरती , कश्मीर में इन सरकारों ने क्या उखाड़ लिया जब हिन्दुओं को बेदखल किया गया >? असं में अपनी ही जमीन से उजाड़ दिया जा रहा है , क्या कर लिया ? आपने आखिर में एक बहुत अच्छी बात कही की हमें इनका स्वागत करना चाहिए किन्तु इसके साथ साथ अंतर राष्ट्रिय मानवाधिकार आयोग में भी अपनी बात रख्ग्नी चाहिए क्योनी पाकिस्तान जैसे असफल और अयोग्य राष्ट्र से कोई उम्मीद रखना गलत होगा !

    akraktale के द्वारा
    24/08/2012

    आदरणीय योगी जी                      सादर, आपकी आशा अनुकूल  विस्तृत नहीं लिख पाने के लिए दिलगीर हूँ किन्तु मेरा अनुभव रहा है कि अधिक लंबे आलेख में ब्लोगर्स मूल मुद्दा ही खोजते हैं और अन्य बातों को नजरंदाज  कर देते हैं इसलिए मै ज़रा छोटे आलेख ही लिखता हूँ ताकि जितना लिखूं उतना तो मै पाठक तक पहुंचा ही सकूँ. कुछ बातें मैंने अपने अन्य आलेख में भी लिखी हैं. अपने ही देश में हिंदुओं कि दुर्गति किसी से छिपी नहीं है. इसलिए आपकी बातों से इनकार नहीं किया जा सकता. अवश्य ही सरकारों को इस ओर भी ध्यान देना जरूरी ही हो गया है.आपकी बातों से सहमति है. आभार.

jlsingh के द्वारा
24/08/2012

आदरणीय अशोक भाई जी, नमस्कार! अपनी जमीन को छोड़कर आना निःसंदेह किसी के लिए भी कष्टप्रद होता है. मेरे विचार में यह कोई चाल नहीं वरन पाकिस्तानी हिन्दुओं की मजबूरी ही है. विषय गंभीर है चर्चा होनी चाहिए. एक ज्वलंत विषय पर सार्थक चर्चा के लिए बधाई अशोक जी.

    akraktale के द्वारा
    24/08/2012

    जवाहर जी भाई सादर नमस्कार, सरकार को कोई भी निर्णय भावुकता के वश में आकार नहीं बल्कि सच्चाई जों जान समझ कर करना चाहिए. ताकि बाद में पछताना ना पड़े. आपकी विचारणीय प्रतिक्रया के लिए धन्यवाद.

dineshaastik के द्वारा
24/08/2012

आदरणीय अशोक जी, मुझे भी लगता है कि सरकार को इस संबंध में गहन विचार विमर्श  एवं पूरी जानकारी के बाद ही कोई निर्णय लेना चाहिये।

    akraktale के द्वारा
    24/08/2012

    दिनेश जी                सादर, आपका कहना बिलकुल ठीक है. सरकार को कोई भी निर्णय देशहित और जनहित को ध्यान में रखकर ही करना चाहिए. आपकी स्पष्ट प्रतिक्रया का धन्यवाद.

manoranjanthakur के द्वारा
23/08/2012

राजनेताओ को इस से koi lena देना नहीं है हिन्दुओ की paresani कश्मीर से लेकर पाकिस्तान तक है सुंदर पोस्ट बधाई

    akraktale के द्वारा
    24/08/2012

    मनोरंजन जी सादर, सही कहा है आपने राजनेताओं ने कभी भी हिंदुओं के हित के लिए आगे आने का साहस नहीं दिखाया है.आपकी बेबाक प्रतिक्रया के लिये. धन्यवाद.

vikramjitsingh के द्वारा
23/08/2012

आदरणीय अशोक जी…..सादर…. आप के विचारों से पूर्णतया सहमती….. लेकिन अगर पाकिस्तान सरकार वहां के हिन्दुओं की सुरक्षा के प्रति वचनबद्ध होती…..तो हिन्दू आते ही क्यों वहां से….??? हिजड़ों की सरकार तो दिल्ली में बैठी है….अगर ये चाहते तो क्या U.N.O. में इस मुद्दे को उठाया नहीं जा सकता था….लेकिन इन को तो मुसलमानों से ही प्यार है….फिर वो चाहे बंगलादेश से हों….या कहीं से भी……क्योंकि उनके आते ही राशन कार्ड, वोट कार्ड… सब बन जाते हैं…..और उनको ये भी बता दिया जाता है…कि उनके पोलिंग बूथ कहाँ पर हैं…… और हिन्दू जाये भाड़ में….. इनको क्या मतलब…..यही हाल नेहरु का था…..यही इंदिरा का और अब यही हाल इन मरदूदों का भी है….देखा जाए तो देश में एक और पाकिस्तान जन्म ले चुका है…क्योंकि पाकिस्तान की मुस्लिम आबादी से कहीं ज्यादा मुसलमान इस देश में बैठे हैं…… बाल ठाकरे को २५ साल हो गए कहते हुए….कि इन बांग्लादेशियों को यहाँ से निकालो…..लेकिन सुनता कौन है….??? महाराष्ट्र में क्यों नहीं घुसते ये बंगलादेशी…वहां जूतियाँ पड़ने का डर रहता है….इसलिए मौन मोहन के क्ष्रेत्र (मणिपुर) में ही डेरे डाल के बैठे हैं……कौन रोकेगा इन्हें…???

    akraktale के द्वारा
    24/08/2012

    आदरणीय विक्रमजीत जी                                 सादर, आपका आक्रोश जायज है, पिछले ६५ वर्ष उदाहरण है लगातार बंगलादेशी देश में प्रवेश कर रहे हैं. इन्हें वोट देने कि भी सुविधा मिल गयी है. कांग्रेस ने ही अधिक शासन किया है तो निश्चित ही यह उनकी ही गलती का परिणाम है. देश में आज भी हिन्दुस्तान में हिंदुओं कि अपेक्षा मुस्लिमो के हितों कि अधिक चिंता कि जाना सरकार कि साम्प्रदायिक मानसिकता को उजागर करता है. आपकी आक्रोश भरी प्रतिक्रया के लिए ह्रादयातल से आभारी हूँ. धन्यवाद.

drbhupendra के द्वारा
23/08/2012

अपना घर बार छोड़ना और सदैव के लिए मातृभूमि का परित्याग करना मजबूरी की निसानी होती है कोई चाल नहीं है……. लेकिन फिर भी भारत सरकार को इन लोगो का इतिहास पता लगाकर ही शरण देनी चाहिए .. साथ ही मै आपको अपने ब्लॉग पर भी आमत्रित करता हु…

    akraktale के द्वारा
    24/08/2012

    भूपेंद्र जी            सादर नमस्कार, आपका कहना बिलकुल सही है कोई भी अपनी मात्रभूमि को मजबूरी में ही छोडेगा फिरभी यदि सच्चाई पता लगा ही ली जाए तो क्या बुरा है. आपने अपना मत रखा बहुत बहुत धन्यवाद.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
23/08/2012

आदरणीय अशोक जी सादर अभिवादन. तथ्यात्मक लेख. गहन मंथन की आवश्यकता. परन्तु आपकी बात नाजायज कदापि नहीं है. सहमत. मेरे मष्तिष्क को मथने के लिए धन्यवाद.

    akraktale के द्वारा
    24/08/2012

    आदरणीय प्रदीप जी                   सादर नमस्कार, बहुत प्रसन्नता हुई.इस मंथन से भले कुछ हलाहल निकले किन्तु अंत में अमृत भी अवश्य ही निकलेगा ऐसी आशा है. आपका हार्दिक आभार.

nishamittal के द्वारा
23/08/2012

पाकिस्तान का रिकार्ड देखते हुए कैसे विशवास किया जा सकता है.आतंकवादियों का ऐसे में घुस आना अनिवार्य ही है सहमती आपसे.

    akraktale के द्वारा
    24/08/2012

    निशा जी          सादर नमस्कार, आपका इस तरह सोचना भी गलत नहीं है. किसी दगाबाज से बहुत अच्छी उम्मीदें लगाना भी बेमानी ही है. आपने अपने अमूल्य मत से अवगत कराया, आभार आपका.

vinitashukla के द्वारा
23/08/2012

अपनी जमीन को छोड़कर आना निःसंदेह किसी के लिए भी कष्टप्रद होता है. मेरे विचार में यह कोई चाल नहीं वरन पाकिस्तानी हिदुओं की मजबूरी ही है. एक ज्वलंत विषय पर सार्थक चर्चा के लिए बधाई अशोक जी.

    akraktale के द्वारा
    24/08/2012

    विनीता जी सादर, आपने जों कहा है वही सत्य हो. मगर आजादी के बाद वहाँ पर बस जाने का फैसला भी उन हिंदुओं का अपना था. अपना मत रखने के लिए आपका हार्दिक आभार.


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