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यह भी सत्य है!

Posted On: 15 Aug, 2012 Others में

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                     आज देश ६६ वां स्वाधीनता दिवस मना रहा है.सभी को शुभकामनाएं. जब  १५ अगस्त १९४७ को देश स्वतंत्र हुआ तब मो. जिन्ना ने मुस्लिमो के लिए एक अलग राष्ट्र कि मांग की इसी कारण पाकिस्तान का निर्माण हुआ. उस वक्त के हालात बेकाबू हो जाने से कई मुस्लिम परिवारों को यहीं पर बस जाना पड़ा. बाद में हालात सामान्य होने पर भी ना तो  हिन्दुस्तान कि सरकार को और ना ही पाकिस्तान कि सरकार को  इस बात की फिक्र रही कि बचे हुए लोगों को किस प्रकार उनके मुल्क में भेजा जाए. मानवता के नाते यह उन पर ही छोड़ दिया गया कि वे जहां रहना चाहे रहें.

                                     हिन्दुस्तान के क़ानून में इस बात कि गुंजाइश रखी कि इस्लाम धर्म के मानाने वाले यहाँ किसी प्रकार कि असुरक्षा महूसस ना करें. कई कानून ऐसे भी हैं जों देश में अन्य धर्मो के मानने वालों के साथ अन्याय जान पड़ते है.फिरभी कभी किसी ने इनको बदलने के लिये आवाज तक नहीं उठायी. आज भी यदि कोई मुस्लिम परिवार में पिता के मकान का बंटवारा होता है तो पिता के जीवित रहते हुए भी उन्हें उसकी रजिस्ट्री पर कोई शुल्क नहीं लगता.अन्य सभी धर्मो के मानने वालों को यह सुविधा पिता कि म्रत्यु के पश्चात ही मिलती है.यह सिर्फ एक उदाहरण मैंने प्रस्तुत किया है. कभी भी हिन्दुस्तान का मुसलमान भयभीत नजर नहीं आया. कभी भी उसके मन में यहाँ से पलायन कि बात नहीं आयी होगी जैसा कि हम पाकिस्तान के हिंदुओं में देख रहे हैं.

           images                          मगर इतनी सब सुविधा मिलने के बाद भी इस समाज ने देश को क्या दिया? कभी भी किसी इस्लामिक संगठन ने या इस्लाम को मानने वाले नेताओं ने कभी भी देश में बढ़ रही जनसंख्या के लिए या काश्मीर से पलायन करते हिंदुओं के लिए, पकिस्तान में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार के लिए, देश में पनप रहे भ्रष्टाचार के लिये या कभी भी मुस्लिम मुल्क में हिंदुओं पर हुए अत्याचार के लिए कभी भी कोई राष्ट्रीय स्तर का आंदोलन नहीं किया है. कभी भी इन्होने देश में मुस्लिम आतंकियों के कारण होने वाली घटनाओं पर राष्ट्रीय स्तर पर कोई आंदोलन नहीं छेड़ा है. जब कि देश में कई देशद्रोह कि ऐसी घटनाएं हुई हैं  जिनमे मुस्लिम धर्म के लोग शामिल थे. राजनेता अपना उल्लू सीधा करने के लिए जिसे धर्म से ना जोड़कर हमेशा कभी आंतंकवादी तो कभी कुछ और नाम देकर पर्दा डालते रहे हैं. मगर क्या इससे सच्चाई  छुप जायेगी.  इससे क्या समझा जाए?

                   Amar-Jawan-Jyoti-2              मुंबई में पिछले दिनों आसाम कि घटनाओं पर प्रदर्शन के दौरान २६/११ के शहीदों के सम्मान में बनी अमर जवान ज्योति को क्षतिग्रस्त किया गया चित्रों को देखकर साफ़ जाहिर होता है कि यह एक सुनिश्चित योजना का हिस्सा है किन्तु इसके बाद भी किसी मुस्लिम धर्मगुरु या राष्ट्रीय संगठन ने साफ़ खुलकर इसकी निंदा नहीं की. दुःख कि बात है कि जों मुस्लिम नेता कांग्रेस में बैठे हैं  जों देश कि तरक्की के लिए देश के जन जन के आंदोलन को रामलीला करार दे रहे हैं उनके द्वारा भी इस देशद्रोह ही घटना, जिस में अमर जवान ज्योति को तोड़ने के साथ ही साथ पाकिस्तान के झंडे लहराने जैसे कृत्य भी हुए हैं, पर खुलकर कोई बयान नहीं दिया गया. आज देश जब आजादी के ६५ वर्ष बाद मुस्लिम धर्म के लोग हिन्दुस्तान कि तरक्की में बड़ी भागीदारी नहीं करना चाहते तो इस सत्य को हम कैसे झुठला सकते हैं.

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55 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

yamunapathak के द्वारा
04/09/2012

आदरणीय अशोक जी नमस्कार इस बीच कई अछे ब्लॉग पढ़ने से मैं वंचित रह गयी थी.आप ने यहाँ जिस समस्या को रखा है वह हर भारतीय के विचार को झकझोरता है.यह bahut badee गलती स्वयं गांधी जैसे लोगों से हुई वे भी अल्पसंख्यक मान उनके प्रति तुष्टिकरण की नीती अपनाते रहे . यह तस्वीर fb पर जब देखा तो समझ नहीं आया आपके ब्लॉग से स्पष्ट हुआ. आपका अतिशय धन्यवाद

    akraktale के द्वारा
    05/09/2012

    यमुना जी              सादर, यदि मुस्लिम समाज देशद्रोह की घटनाओं की निंदा करने के लिए भी आगे नहीं आयेगा तो ऐसे लोगों की देश में रहने का क्या हक़ है, आपने कई दिनों बाद मंच पर लौटकर मेरा यह आलेख पढ़ा इसके लिए आपका हार्दिक आभार.

DHARAMSINGH के द्वारा
24/08/2012

आप की बात सही है पर ईस के लिए मुख्यतया गान्धी जुमेवार था जो मर कर भी नही मरा कांग्रेस ऐक विदेसी संस्था है उसे गदी चाहिये हिन्दुओ से क्या लेनाहिन्दू बेवकूफ जो  ईसे वोट देते हैं

    akraktale के द्वारा
    25/08/2012

    आदरणीय धरम सिंह जी                        सादर अभिनन्दन स्वागत है आपका, आपका कहना सही है यह विदेशी कांग्रेस है जिसकी विचारधारा नेहरु से शुरू होती है नेहरु पर ही खत्म होती है. जिसका कार्य है किसी भी तरह से निजी धन बनाना उसे बचाना और अय्याशी करना और इसके लिए हर कीमत पर कुर्सी हासिल करना. इसी कि परिणिति है की देश में आज लाखों विदेशी बेफिक्र मजे कर रहे हैं और आये दिन उपद्रव करने लगे हैं.इन्ही के यहाँ विदेशी आतंकवादी मजे से शरण लेते हैं और अपने स्वार्थ के कारण यहाँ के मुस्लिम समुदाय के धर्म प्रमुख खामोश जुबान पर ताला डाले बैठे हैं.जों बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण है. आपका विचारशील प्रतिक्रया देने के लिए आभार.

aman kumar के द्वारा
24/08/2012

हमें भी इनकी मनोदशा का विश्लेषण करना होंगा | इनके सपने पाकिस्तान की असली हालत दिखानी होंगी , क्या हो रहा है बहा पर फिर शिक्षा का प्रसार जरुरी है | तुस्टीकरण की राजनीती करने वालो की राजनीती ख़तम करनी होंगी | ताकि इन्हे वोट बैंक नही देश का हिस्सा माना जाये | रण

    akraktale के द्वारा
    25/08/2012

    अमन जी              सादर अभिनन्दन है आपका, आपने बहुत कम शब्दों में सारी बात कह दी है. राजनेता यदि सुधर जाएँ तो इनको आइना दिखाया जा सकता है. किन्तु आज के हालात में तो मै यही कह सकता हूँ काश ऐसा संभव् हो. आभार.

Rahul Nigam के द्वारा
23/08/2012

रक्ताले जी, आपका रोष वाजिब है. लेकिन इस समस्या का निदान जानते हुए भी उस पर अमल व्यवहारिक न हो तो असंतोष लाजमी है. जहाँ तक मुझे पता है पाकिस्तान के माता पिता नेहरू और जिन्ना है. इन दोनों की जिद के चलते गाँधी जी ने दाई का काम किया था और पाकिस्तान का जन्म हुआ. खैर बीती बातों से सीख तो ली जा सकती है पर उस पर रोया जाना वक्त बर्बाद करने के तुल्य है. वर्तमान में यदि वोटों की राजनीति को परे रख कर देखा जाय अपरिभाषित ‘धर्म निरपेक्ष’ राज्य में केवल भारतीय कानून होना चाहिए. हिन्दू अथवा मुस्लिम कानून किसी पर थोपा नहीं जाना चाहिए. धर्म निरपेक्ष राज्य में कट्टरता का कोई स्थान नहीं होना चाहिए. धर्म की आड़ में अपने समाज के ‘गलत’ लोगो का साथ देना निंदनीय तो है ही पर चुप्पी साधना भी साथ देने के बराबर है. आपसे सहमत हूँ. आपकी आशंका की उपेक्षा करना अक्लमंदी तो कतई नहीं है. जब तक धर्म इंसानियत से बड़ा रहेगा तब तक इंसान जानवरों की मौत मरता रहेगा. “इंसानियत पे मजहब का पहरा हो, ‘जात’ का रंग महब्बत से गहरा हो, ‘आज़ादी’ का जश्न हम कैसे मनाये जब क़ानून अँधा, हुक्मरान बहरा हो.

    akraktale के द्वारा
    25/08/2012

    राहुल जी               सादर, देश कि हकीकत पर लिखी आपकी अंतिम पंक्तियाँ पूर्णतः सत्य हैं. इस बात में कोई दो राय नहीं है कि देश में एक ही क़ानून होना चाहिए,मगर नेहरु से ले कर आजतक सभी लगातार वोट बैंक के खो जाने के भय से गलत बातों को ही प्रश्रय देते रहे हैं. इससे देश में संप्रदायों के बीच दूरियां बढ़ी है. थोड़ा पाने कि लालच में बड़ा झूठ बोला जा रहा है. यह देश को गर्त में ले जाने का ही कार्य करेगा और कर भी रहा है. आपकी सुन्दर प्रतिक्रया के लिए आभार. 

Rajkamal Sharma के द्वारा
22/08/2012

आपने सवाल तो उचित उठाये है लेकिन इनके उत्तर खोजने के लिए पी.एच.डी. करनी पड़ेगी ….. अगर भ्रूण हत्या रुक जाए तो फिर हम भी अगर चार नहीं तो कम से कम दो शादिया कर ही डालेंगे फिर आबादी में असमानता दूर होते देर नहीं लगेगी नमस्कार सहित मुबारकबाद इस अछूते विषय पर सटीक लेखन के लिए जय श्री राम

    akraktale के द्वारा
    25/08/2012

    आदरणीय राजकमल जी                           सादर, पी एच डी नहीं जागरूकता अभियान कि आवश्यकता है उत्तर खुद ब खुद आ जायेंगे. भ्रूण ह्त्या रोकने के लिए आपको ही पहल करनी होगी और इसके लिए दो से काम नहीं चलेगा चार शादियाँ तो कम से कम करनी ही होगी. आभार आपको विषय और लेखन पसंद आया. जय जय श्री राम.

seemakanwal के द्वारा
21/08/2012

आदरणीय अशोक जी सादर नमस्कार .मैं आप से पूरी तरह सहमत हूँ की मुस्लिम समाज और धर्म गुरुओं को आवाज़ उठानी चाहिए .

    akraktale के द्वारा
    25/08/2012

    सीमा जी                सादर नमस्कार, आपकी सहमति का शुक्रिया, अवश्य ही इस वतन परस्त कौम को यह दिखाना चाहिए था कि वे अपने धर्म और देश के साथ खड़े हैं. 

Ramesh Nigam के द्वारा
21/08/2012

What to say of Mulayam, Lalu, Nitish and Soniya, will any so called nationalist leader like Adwani, Sushma, Arun speak this truth? Shall the Hindus accept this bitter truth? Shall any Gandhian express his/her thesis? Shall Khushwant, Kuldip or their ilk keep their mouth shut or ever open it in this regard? Where are the champions like Teesta, (Justice) Sachchar & Rangnath, John Dayal, Subhashini Ali…………………..?

    akraktale के द्वारा
    25/08/2012

    आदरणीय निगम जी                     सादर, आपकी चिंता वाजिब है और इसी कारण विसंगति बढती जा रही है. आपने जिस तरह से इन बड़े नामो पर प्रश्न चिन्ह लगाए हैं वह आपकी विचारशीलता को प्रदर्शित करता है . आपकी प्रतिक्रीया से अवश्य ही इस आलेख कि गरिमा बढ़ी है. आभार.

yogi sarswat के द्वारा
21/08/2012

आदरणीय श्री रक्ताले जी सादर नमस्कार ! आपका लेखन सदैव ही सार्थक और सटीक होता है ! भारत में जितने मुस्लिम रहते हैं उनमें से एक बड़ा वर्ग आज तक इस देश को अपनी धरती अपना आसमान नहीं मानता , अन्यथा जिस धरती पर रहते हैं , जिस देश की मिटटी का नाज खाते हैं , जिस देश की हवा में सांस लेते हैं उसी के शहीदों के प्रतीक “अमर जवान ज्योति ” को तोड़ते हुए इनके हाथ नहीं कांपे ? ये किस मिटटी के बने हैं , या तो ये गद्दार हैं या फिर ये इस देश के दुश्मन !

    akraktale के द्वारा
    25/08/2012

    आदरणीय योगी जी                    सादर नमस्कार, इसमें तो कोई संदेह ही नहीं है. जिन्होंने यह कृत्य किया है वे १०० प्रतिशत देश के दुश्मन ही हैं. किन्तु मुस्लिम समाज द्वारा इन्हें सामने लाने से बचना कहीं ना कहीं उनकी देश के प्रति आस्था पर सवालिया निशान खडा कर रहा है. आपकी सार्थक प्रतिक्रया के लिए धन्यवाद.

ajay kumar pandey के द्वारा
20/08/2012

आदरणीय रक्ताले जी नमन लिखने को तो बहुत कुछ था पर अपनी समाजसेवा का आजतक कोई कार्य नहीं किया की उसपे लेखन करते अभी तो सिर्फ इन नेताओं की सियासी चाल ही दिखानी थी तो उस पर लेखन कर दिया जब कुछ समाजसेवा का कार्य करूँगा जब भी तो लिखूंगा बस आप अपना आशीर्वाद बनाये रहेंगे येही वांछा है रक्ताले जी आपकी काव्यात्मक प्रतिक्रिया का दिल से आभार जो आपने मेरी पोस्ट को पढ़ा और इतना समय दिया हार्दिक आभार धन्यवाद अजय कुमार पाण्डेय

    akraktale के द्वारा
    25/08/2012

    शुक्रिया! आशा है आप अवश्य ही समाज सेवा के कार्यों में अपना नाम रोशन करेंगे.शुभकामनाएं.

ajay kumar pandey के द्वारा
18/08/2012

आदरणीय रक्ताले जी नमन आपने मेरी पोस्ट को इतना समय दिया उसके लिए हार्दिक धन्यवाद आपकी यह पोस्ट यह भी सत्य है मुझे अच्छी लगी आपने इसमें देश का सत्य शब्दों के जरिये जाया कर दिया है धन्यवाद अजय कुमार पाण्डेय

    akraktale के द्वारा
    19/08/2012

    आपको शब्द जाया करना लगा यह आपकी महानता है. धन्यवाद.

    Rajkamal Sharma के द्वारा
    22/08/2012

    नटखट बच्चों की बातो का बुरा नहीं माना करते

vikramjitsingh के द्वारा
18/08/2012

अक्षरक्ष सत्य……अशोक जी….. पूर्णतया सहमती….. सादर….

    akraktale के द्वारा
    19/08/2012

    विक्रमजीत भाई                सहमति के लिए धन्यवाद.

Rajesh Dubey के द्वारा
18/08/2012

धर्मनिरपेक्षता अच्छाई की जगह जब बुराई बन जाय तो सोचने वाली बात है. दवा जब बिष बन जाय तो सोचने वाली बात हो जाती है. कुत्सित राजनीतिज्ञ अपने स्वार्थ के लिए देश को बेचने में नहीं हिचक रहे हैं. चिंतनीय है. तस्वीरों में शहीद स्मारक को क्षति पहुचाने वाले लोगो को पहचान कर पुलिस सजा दे आवश्यक है.

    akraktale के द्वारा
    19/08/2012

    राजेश जी               सादर, राजनेता तो सिर्फ वोट कि राजनीति में विश्वास रखते हैं उसके बाद देश जाय भाड में उन्हें अपने कारोबार कि ही चिंता रहती है.

bebakvichar, KP Singh (Bhind) के द्वारा
17/08/2012

रक्तले जी, मैं मानता हूं कि आपने काफी शोध करके यह लेख लिखा होगा परंतु मैं पूरी तरह यह नहीं मान सकता कि देश की स्थिति के लिए केवल मुस्लिमों को दोषी ठहराया जाए चूंकि जयचंद जैसे लोग मुसलमान नहीं थे। हालांकि, इसके लिए कुछ दोष शिक्षाओं का हो सकता है। इसके लिए असल में जिस जेहाद -परिवर्तन की जरूरत है उसकी इच्छाशक्ति हम कभी दिखा ही नहीं पाए। यही वजह रही कि हम केवल अवतारवाद में यकीन करते हुए किसी अवतार के आने की आकांक्षा करते रहे जबकि हकीकत यह है कि किसी समस्या का निदान करने के लिए हमें स्वयं ही प्रयास करने पड़ेंगे। हो सकता है कि कुछ लोग मेरी राय से सहमत न हों परंतु आज भी मुस्लिम समाज के लोग अशिक्षा के अभाव में तमाम मजदूरी काम कर रहे हैं। ऐसे में जरूरी है कि उन्हें विकास से परिचित कराया जाए। जब तक यह समझ नहीं आएगा धर्म या राजनीति के ठेकेदार बन चुके लोग बरगलाने से बाज नहीं आएंगे। साभार….. मेरी आकांक्षा है कि आप मेरे इस लेख को जरूर पढ़ेंगे, तो थोड़ी स्थिति और भी साफ हो सकेगी…… http://bebakvichar.jagranjunction.com/2012/08/16/%E0%A4%B9%E0%A4%B0-%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B2%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%9C%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88-%E0%A4%9C%E0%A5%87%E0%A4%B9/

    akraktale के द्वारा
    19/08/2012

    आदरणीय सिंह साहब                           नमस्कार, आप सही कह रहे हैं मैंने भी पूर्णतया मुस्लिमों को दोषी नहीं कहा है. मगर उनका पार्ट पूर्ण रूप से खामोशी का ही रहा है. जों उनकी नकारात्मकता को दर्शाता है. जब हम कसाब को या अफजल को फांसी देने कि बात करते हैं तो कभी मैंने नहीं सूना कि किसी मुस्लिम संगठन ने भी ऐसी आवाज उठायी हो या कभी सरबजीत के लिए कोई मुस्लिम संगठन पाकिस्तान गया हो. क्यों? इनका पिछडापन इनके ही धर्मगुरुओं कि देन है. जों इन्हें अन्य धर्मो से अलग किये रहते हैं. आपके बेबाक विचार के लिए धन्यवाद.

    Ramesh Nigam के द्वारा
    21/08/2012

    Shree K P Singh has expressed the same old Gandhian outdated and condemned argument which has pushed nation to bankruptcy. It is useless thinking. It is worth rejection. Mr Singh has miserably failed to see the design of those who are pursuing .the agenda of PAN ISLAMIC MOVEMENT: May God enlighten him to see the truth.

    akraktale के द्वारा
    25/08/2012

    आदरणीय निगम साहब                           सादर अभिनन्दन,                     सच है. आद. सिंह साहब ने एक दूसरा पहलू सामने लाने का प्रयास किया है, जबकि उन्हें देश में मुस्लिम सहभागिता पर भी अवश्य ही लिखना था.

ANAND PRAVIN के द्वारा
17/08/2012

आदरणीय अशोक सर, सादर प्रणाम दुर्भाग्यपूर्ण है यह सब जिसे आपने लिखा है सर………….किन्तु एक कडवी सच्चाई है आज अल्पसंख्यक कहे जाने वाले इस समुदाय के बारे में जो भी कहा जाय कम है …….. ऐसा नहीं है की सभी व्यक्ति इस समुदाय के विक्षिप्त मानसिकता के शिकार है किन्तु ज्यादातर लोगों का बहुत बुरा हाल है……………अपने देश में रह कर पाकिस्तान का झंडा फहराने वालों को तो इन्ही लोगों को पकरना चाहिए था…………….इसके अलावा कट्टरता ने इस धर्म के आधार को ही हिला रखा है…….नारियों का दमन और इन्शानियत के क़त्ल के अलावा सायद ही कोई बात समझ में आती हो कहने के लिए बहुत कुछ है किन्तु बड़ा ही संवेदशील मुद्दा है……………..सभी को कोशना भी गलत है सही विरोध होना चाहिए

    ANAND PRAVIN के द्वारा
    17/08/2012

    एक सत्य यह भी है सर……..हमें तो अपनों ने लुटा गैरों में कहाँ दम था इस देश में जब तक कांग्रेस जैसी पार्टी और लालू मुलायम जैसे नेता हैं सम्प्रदाइक्ता नहीं खत्म होगी

    akraktale के द्वारा
    19/08/2012

    प्रिय आनंद जी                  नमस्कार, आपने थोड़े में अधिक और सही लिखा है. सभी गलत नहीं हैं मै सबको गलत नहीं कह रहा किन्तु चोर का साथ देने वाला भी चोर ही कहलाता है. देशद्रोह कि घटनाओं पर मुस्लिम धार्मिक गुरु और नेता क्यों खुलकर नहीं बोलते? क्या उन्हें देश कि तरक्की में भागीदार बनना पसंद नहीं है? 

munish के द्वारा
17/08/2012

आदरणीय रक्ताले जी देखा जाए तो मुस्लिम धर्म हिन्दुस्तान की तरक्की मैं बाधक बना हुआ है जिसे कोई कहता नहीं है

    akraktale के द्वारा
    19/08/2012

     मुनीश जी             सादर नमस्कार, मुस्लिम धर्म नहीं किन्तु इसको आधार बना कर हो रही राजनीती से देश में वर्ग विभाजन हो गया है. और मुस्लिम धर्म गुरु खामोश हैं. यह दुखद है. आपकी प्रतिक्रया के लिए धन्यवाद.

rekhafbd के द्वारा
17/08/2012

अशोक जी ,मे आपसे शत प्रतिशत सहमत हूँ ,लेकिन यह हमारे देश का दुर्भाग्य है ,आज देश जब आजादी के ६५ वर्ष बाद मुस्लिम धर्म के लोग हिन्दुस्तान कि तरक्की में बड़ी भागीदारी नहीं करना चाहते तो इस सत्य को हम कैसे झुठला सकते हैं.आभार

    akraktale के द्वारा
    18/08/2012

    रेखा जी              सादर, सहमति के लिए धन्यवाद. अवश्य ही दुखद है मुस्लिम समाज के धार्मिक नेताओं द्वारा आतंकवादी या गलत कार्य में लिप्त लोगों से नफ़रत करने का संदेश समाजजनों को ना देना. 

vaidya surenderpal के द्वारा
17/08/2012

अशोक जी नमस्कार, बिल्कुल सही कहा है आपने , मैं आपसे पूर्णतया सहमत हुं । लगता है हिन्दूओँ को प्रताड़ित करने के इस्लामी एजेण्डे मे सोनिया की यूपीए सरकार भी शामिल है ।

    akraktale के द्वारा
    18/08/2012

    आदरणीय सुरेन्द्रपाल जी                     सादर नमस्कार अभिनन्दन, सही कहा है आपने यदि यूपीए ने धर्मनिरपेक्षता कि आड में पक्षपात नहीं किया होता तो हालात कुछ और ही होते. समय निकाल कर प्रतिक्रया देने के लिए धन्यवाद.

jlsingh के द्वारा
17/08/2012

अशोक भाई जी, नमस्कार! हो जाती हैं मेरी प्रतिक्रियाएं लुप्त, नहीं जान सका क्या है यह राज गुप्त! रमजान के महीने में टोपी पहन कर जो शहीदों के स्मारक को लात से मारे भला कैसे हो सकता है वह भारत का सपूत! सादर साभार !

    akraktale के द्वारा
    17/08/2012

    जवाहर जी भाई                       नमस्कार,                          जेजे का यह मंच भी नित नए नए दिखलाये खेल,                        कुछ देरीही सही पर हुआ तो सत्य का सत्य से मेल.                            बिलकुल सही है देशभक्त ऐसे कृत्य नहीं करते. धन्यवाद.

bharodiya के द्वारा
16/08/2012

अशोकभाई नजर उठा के देखो महामहिम कौन है ? उनके महलमें दो बार अडवानी का अपमान क्यों हुआ ? उनके लिए भ्रष्ट कोंग्रेसी वी.आई.पी और जेटली, सुश्मा और अडवानी आम आदमी की कतार में ? सेना प्रमुख को भी साईड में खडा रहने मजबूर करो एक कुरसी भी नही ? मुंबई की घटना बाबाकी काट थी और ईमर्जंसी बोने का बीज था । वरना उस एरिया में लाठी ले के जाना कैसे संभव है ?

    akraktale के द्वारा
    17/08/2012

    भरोडिया जी भाई                      नमस्कार, दुखद है एक भूतपूर्व उपप्रधानमंत्री खडा रहा बहुत ही अशोभनीय तरीका है.पुणे और मुंबई कि घटना को इसी प्रकार माना जा रहा है किन्तु सत्यता के कोई खास साबुत मौजूद नहीं हैं. वैसे कांग्रेस का स्तर इतना गिर चुका है कि इन पर कोई भरोसा नहीं है.धन्यवाद.

phoolsingh के द्वारा
16/08/2012

sir namskar, बहुत सुंदर लेख के लिए बधाई. फूल सिंह

    akraktale के द्वारा
    17/08/2012

                             धन्यवाद आ. फूलसिंह जी.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
16/08/2012

कडुआ सच. बधाई आदरणीय अशोक जी, सादर प्रणाम. देश का दुर्भाग्य है.

    akraktale के द्वारा
    17/08/2012

    आदरणीय प्रदीप जी                 नमस्कार,                   सहमती के लिए धन्यवाद. सच यह दुर्भाग्य है कि एक राष्ट्रभक्त कौम उसके अनुयाईयों के कारण बदनाम हो रही है.

pritish1 के द्वारा
16/08/2012

सरफरोशी की तमन्ना अब हमारे दिल मैं है…….परिवर्तन होगा अवश्य होगा कुछ समय शेष है प्रतीक्षा के……..शेखर और भगत ने कही न कही फिर से जन्म ले लिया है……..अपनी माँ को आजाद करने को……. तेरे सोने रूप को हम एक नयी बहार देंगे अपने ही लहू से तेरा रंग हम निखार देंगे http://pritish1.jagranjunction.com/2012/08/15/ham-swatantra-nahi-hain/

    akraktale के द्वारा
    17/08/2012

    प्रीतिश जी                आपके जज्बे को सलाम. जयहिंद.

dineshaastik के द्वारा
16/08/2012

आदरणीय अशोक जी, सादर नमस्कार। यदि मुम्बई की घटना न होती तो सामान्यतः मेरे लिये आपकी बातों से सहमत होना थोड़ा कठिन होता। लेकिन अब आपकी बातों से सहमत भी हूँ और इस तरह की घटना से बहुत ही दुखी तथा चिन्तित भी। आश्चर्य तो होता है कि महाराष्ट्र अस्मिता के नाम से उत्तरभारतियों पर सितम करने वाली पार्टियाँ  अब कहाँ हैं। इससे साबित होता है कि राजनैतिक दलों को देश से कोई मतलब नहीं हैं। यह तो जो कुछ करती हैं केुवल सत्ता प्राप्त करने के लिये करतीं हैं।

    akraktale के द्वारा
    17/08/2012

    आदरणीय दिनेश जी                     सादर, मै सिर्फ कल कि बात नहीं बल्कि आजादी के बाद के सभी वर्षों पर बात कर रहा हूँ और इसमें असहमति हो तो इसके लिए मुस्लिम संगठनो द्वारा देश हित कि मुद्दों पर किये गए राष्ट्रीय आंदोलनों और इनके धार्मिक गुरुओं द्वारा गलत कार्य में सम्मिलित मुस्लिमो को कोई सजा दी है इसकी जानकारी देनी होगी. आप ने सहमति दर्शायी है और हकीकत है भी यही. राजनेता तो सिर्फ वोट के स्वार्थ से अधिक कुछ समझना ही नहीं चाहते. मगर मुस्लिम धर्म के पढ़े लिखे और समझदार लोग भी अपने धार्मिक गुरुओं को नेताओं को समझाने में विफल ही जान पड़ते हैं.

nishamittal के द्वारा
15/08/2012

आपके सभी ट्रकों से अक्षरक्ष सहमत हूँ परन्तु तरस तो आता है हमें अपनी बुद्धि और सामर्थ्य पर कि इस सबके पश्चात भी उसी नाव पर सवार हैं हम .

    nishamittal के द्वारा
    16/08/2012

    कृपया तर्क पढ़ें

    akraktale के द्वारा
    17/08/2012

    निशा जी              सादर नमस्कार, नेताओं को सिर्फ वोट से मतलब है और आज आप देख रही हैं कि किस तरह से यह सरकार संसद पर कब्जा किये बैठी है. जबकि पूरा देश इनके विरुद्ध है. कोई और रास्ता भी नहीं.

yogeshkumar के द्वारा
15/08/2012

महाशय कडुवा सच यही है.. इसके लिए हर बार राजनितिक दलों को दोषी ठहराना भी मुझे समझ नहीं आता.. ये राजनितिक दल भी यहीं के नेता हैं… ऐसा लगता है ये एक धीमी लड़ाई है … हिन्दुओं के विलुप्तिकरण की… ये सनातन धर्म हज़ारों साल से इस भारत भूमि में है..समय के हिसाब से इसने अनेक थपेड़े झेले हैं मगर अभी समस्या कुछ और ही हो गयी .. सनातन धर्म से असंतुष्ट होकर बहुत से धर्म निकले हैं..जैसे जैन, बौद्ध , और सिख…. मगर किसी धर्म में इस तरह का विद्वेष नहीं पैदा हुआ.. मैंने कभी नहीं सुना कि किसी धर्म ने जबरन धर्म परिवर्तन पर जोर दिया हो.. वास्तव में मैंने नहीं सुना कि दुनिया के किसी और धर्म में जबरन धर्मान्तरण हुआ हो.. अगर अभी आप इन्टरनेट पर बैठे थे आपको अहसास हो जायेगा कि दुनिया के हर धर्मावलम्बियों के साथ इस्लाम का बैर चल रहा है.. अगर हाल ही के कुछ आकडे उठाये जाएँ तो आपको मिलेगा क्या ..गुजरात दंगे, राजस्थान के भारतपुर के दंगे, मथुरा के दंगे, कोलकाता में किया गया उथल पुथल, असम के दंगे, मुंबई में बवाल, आये दिन मुस्लिम आतंक वादियों द्वारा विस्फोट कि घटनाएं, पाकिस्तान में हिन्दू लड़कियों का अपहरण और बलात्कार और हिन्दू परिवारों का भारत में शरण मांगना, यही बात बंगलादेश में भी है (तसलीमा नसरीन कि “लज्जा” पड़कर देखिये) ….अनगिनत घटनाएं, …अगर इतिहास पर जायें स्थिति और भी बुरी मिलेगी, शायद लोग सुनना न चाहे… मगर इन्सान जो बात नहीं सुनना चाहता, जरूरी नहीं कि वो उस बात से बच जाये !!!! इस्लाम धर्म ग्रहण करने के बाद लोगों की स्थिति में सुधार आया हो या उन्हें मानसिक शांति मिली हो ऐसे भी कोई आकडे उपलब्ध नहीं है.. हमारे सामने पाकिस्तान, बंगलादेश के मुसलमानों कि स्थिति सामने है.. और ज्यादा दूर कि बात नहीं करें तो भारत के मुसलमानों कि स्थिति सामने है जो अपनी खराब स्थिति के आरक्षण पर जोर दे रहे है.. अगर स्थिति को इच्छाशक्ति और पूरे मन के अभी नहीं सम्भाला गया तो ये निश्चय ही आगे आने वाले समय में समस्या बनाने वाला है..

    akraktale के द्वारा
    17/08/2012

    आदरणीय योगेश जी                  अभिनन्दन, मुस्लिम धर्म में कोई बुराई नहीं है मगर इसके मानने वालों ने धर्म के ठेकेदारों के आगे घुटने टेक दिए हैं और ये ठेकेदार इन्हें सही से दूर कर रहे हैं और गलत कामों के लगाकर अपनी रोटी सेंक रहे हैं. आपकी विस्तृत प्रतिक्रया के लिए धन्यवाद.


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