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सम्मान पिता का याद रहा.

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फादर्स डे  पर  पिता संग बिताए पलों की यादों का पिटारा.

उम्र पिता संग बीत रही, पर पिछला किस्सा याद रहा,
साथ बिताये हर पल का इक इक हिस्सा याद रहा.

बाजारों में त्योहारों पर जाना संग पिता के याद रहा,

पहन नए कपडे कुछ दिन फिर यूँ ही इठलाना याद रहा,

शैतानी कर, डरकर पिता से घर में छुप जाना याद रहा,

और पकडे जाने पर पिता से पिटना पिटाना याद रहा.

तनय वेदना को पढकर मरहम उनका लाना याद रहा,

भूल सका ना परिणामों पर मुस्काना उनका याद रहा,

बचपन के लम्हे लम्हे पर साथ पिता का याद रहा,

और तरुणाई में भी काँधे पर हाथ पिता का याद रहा.
दूर गया मै कुछ दिन उनसे संस्कार उन्ही के याद रहा,

सारा त्याग परिश्रम उनका हर मुस्कानों में याद रहा,

घोर अँधेरे में भी बढ़कर उनका दीप जलाना याद रहा,

डाट भले सौ खाई फिरभी ज्ञान पिता का याद रहा,

खुद पिता बन भूल ना पाया, मान पिता का याद रहा,

नित प्रातः स्मरण माता का, सम्मान पिता का याद रहा.



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81 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

rameshbajpai के द्वारा
02/08/2012

खुद पिता बन भूल ना पाया, मान पिता का याद रहा, नित प्रातः स्मरण माता का, सम्मान पिता का याद रहा प्रिय श्री अशोक जी स्मृतियों की यह श्रृंखला स्नेह दुलार व संस्कारो की असीम महक से भरी है | अपने आदर्श पिता को संस्कारी पुत्र जिस तरह स्मृतियों में जीवंत सहेजता है वह भाव यहाँ विद्यमान है |

Rajkamal Sharma के द्वारा
08/07/2012

राजकमल उर्फ कसाई जी , आपका आभार प्रकट करने के लिए मेरे पास फंड की बेहद कमी हो गई है जल्द ही लोन के लिए अप्लाई करके + अरेंज करके आपका कर्ज चुकता करने की पुरजोर कोशिश करता हूँ – अशोक कुमार “रक्ताले” :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :| :) :( ;) :o 8-) :|

sinsera के द्वारा
04/07/2012

आदरणीय अशोक जी, नमस्कार, सच तो ये है की माँ की शो बाज़ियों का आगे पिता का मूक प्रेम संतानों को कम ही समझ में आता है..लेकिन समझ में न आने पर उसका महत्त्व तो कम नहीं हो जाता..पिता के धीर गंभीर वात्सल्य को प्रदर्शित करती एक ख़ूबसूरत रचना …..बधाई…

    akraktale के द्वारा
    04/07/2012

    सरिता जी सादर, आपने दो पंक्तियों में वह बात कह दी जो मै अपनी पूरी कविता में भी नहीं कह पाया. धन्यवाद.

ajaykr के द्वारा
02/07/2012

वाह ,पिता को समर्पित ये पंक्तियाँ ,दिल को छू गयी सर , http://avchetnmn.jagranjunction.com/2012/07/02/आधुनिक-शिक्षा-का-यह-रूप-भी/

    akraktale के द्वारा
    03/07/2012

    अजय जी सादर अभिनन्दन. धन्यवाद.

ANAND PRAVIN के द्वारा
02/07/2012

आदरणीय अशोक सर, सादर प्रणाम बहुत दिनों बाद मंच पर आ पाया हूँ बहुत ही सुन्दर कविता सर एक पिता को पिता की अनुभूति सबसे अच्छी तरह से समझ आती है आको आपकी इस कविता पर हार्दिक नमन सर आशीर्वाद बना रहे

    akraktale के द्वारा
    03/07/2012

    प्रिय आनंद जी नमस्कार, आप काफी अर्से से मंच से नदारद हैं. अवश्य ही मंच पर आपकी कमी महसूस की जाती है. आपको पिता को समर्पित यह रचना पसंद आयी. शुक्रिया.

24/06/2012

आदरणीय रक्ताले सर, देरी के लिए क्षमा चाहता हूँ| बहुत भावनात्मक रचना……बधाई

    akraktale के द्वारा
    26/06/2012

    गौरव जी नमस्कार, रचना के भाव आप तक पहुंचे प्रसन्नता हुई. धन्यवाद.

yamunapathak के द्वारा
23/06/2012

EK EK PANKTI अपने पिता की याद दिला जा रही है.मैंने अपने जीवन में तीन पिता को करीब से देखा एक मेरे जनक पिता,दुसरे मेरे पिता sasurjee और तीसरे मेरी रानी बिटिया के पापा.आज ही एक ब्लॉग लिखा है पिता और संतान के आधुनिक संबंधों पर चाणक्य की निति शास्त्र के एक कथन से वर्त्तमान परिदृश्य में सहमत नहीं थी आप सभी अभिभावकों की उस ब्लॉग पर बेबाक राय जानना चाहती हूँ.ये मेरे शोध का विषय बन गया है.

    yamunapathak के द्वारा
    23/06/2012

    नमस्कार सर,मैं यह कविता अपनी नोट बुक में लिख कर रखना चाहती हूँ .

    akraktale के द्वारा
    23/06/2012

    यमुना जी सादर नमस्कार, बिलकुल सही तीन पिता उम्र और रिश्तों के मान से व्यवहार में बदल अवश्य देखने को मिलता है.आपका चाणक्य कि निति पर टिपण्णी करना बहुत सुखद है. जब प्रथ्वी के निर्माण पर कई विद्वानों ने अलग अलग प्रतिक्रियाएं दी है तो फिर चाणक्य कि निति पर यदि आप सहमत नहीं है तो अपना मत रखने में बुराई भी क्या है. आप अवश्य लिखें और खुले दिमाग से लिखें. आप इस रचना को डायरी में लिखें यह मेरा सौभाग्य होगा और इस पर मै अपनी सहमती पूर्व में ही दे चुका हूँ. आभार.

allrounder के द्वारा
23/06/2012

नमस्कार अशोक जी, बेहद प्रभावशाली और काव्यात्मक ढंग से अपने पूज्य पिताजी को यादें साझा करने के लिए हार्दिक अभिनन्दन !

    akraktale के द्वारा
    23/06/2012

    सचिन जी सादर, सराहना के लिए. धन्यवाद.

rekhafbd के द्वारा
22/06/2012

आदरणीय अशोक जी ,सादर नमस्ते , खुद पिता बन भूल ना पाया, मान पिता का याद रहा, नित प्रातः स्मरण माता का, सम्मान पिता का याद रहा. पिता के प्रति आपकी भावनाओं को नमन

    akraktale के द्वारा
    23/06/2012

    रेखा जी सादर नमस्कार, रचना कि इन पंक्तियों पर आपके स्नेह के लिए आभार.

meenakshi के द्वारा
20/06/2012

Akraktale जी,आपने ” Father’s Day ” पर पिता जी द्वारा दिए गए संस्कारों को काव्य – रूप में भली-भांति पिरोया है . माता-पिता तो हमेशा अपने बच्चो को अच्छे संस्कार देतें हैं .और वे बच्चे जो कभी किसी परिस्थिति में उन नेक संस्कारों को नहीं भूलते …ये भी बड़ी बात है.. मीनाक्षी श्रीवास्तव

    akraktale के द्वारा
    23/06/2012

    मीनाक्षी जी सादर नमस्कार, सही कहा आपने माता पिता के दिए अच्छे संस्कार आपको प्रगति कि राह पर ले जाते हैं और इस पथ पर आगे चलने के लिए इन संस्कारों का सदैव याद रहना जरूरी है. आपकी सहमतिपूर्ण प्रतिक्रया के लिए धन्यवाद.

akraktale के द्वारा
20/06/2012

अजय जी डायरी लिखना तो अच्छी बात है मगर हर बात को नहीं. कुछ सीख और सुधारों को जीवन में लिखने से भी अच्छा होता है अंगीकार करना. धन्यवाद.

ajay kumar pandey के द्वारा
19/06/2012

आदरणीय रक्ताले जी नमन मैंने आपकी इस कविता को अपनी diary में नोट करने का सोचा है में यह कविता अपनी diary में लिखूंगा यह diary मेरे जीवन की अभिन्न अंग है में जब जागरण में नहीं आया था तो diary में ही अपने विचार लिखकर बंद कर देता था तब से मेरी आदत है diary लिखना धन्यवाद

Ajay Kumar Dubey के द्वारा
19/06/2012

आदरणीय रक्ताले साहब सादर प्रणाम . सुन्दर भावों से युक्त …पिता को समर्पित रचना की प्रस्तुति के लिए हार्दिक आभार…. इधर मेरी उपस्थिति नगण्य है …क्षमा प्रार्थी हूँ…. पिछली प्रस्तुतियों पर कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दे सका…

    akraktale के द्वारा
    19/06/2012

    अजय जी सादर, आपको फादर्स डे पर पिताजी के संग की कुछ यादों पर लिखी कविता पसंद आयी जानकार प्रसन्नता हुई. और पिछली रचनाएं ना पढने पर कैसा गिला पाले बैठे हैं आप, आपने समय निकाल कर मेरी इस रचना को पढ़ा यही मेरे लिए सौभाग्य की बात है. यह तो आपका स्नेह है मंच के साथियों का यही प्रेम तो यहाँ बांधे रखता है.

satish3840 के द्वारा
19/06/2012

बहुत बहुत सुन्दर कविता / पिता वास्तव में एक कुम्भकार की तरह से हें जो मिट्टी के बर्तन को गढ़ कर आम में तपा कर एक कामयाब चीज बनाता हें / बेवजूद से वजूद में तब्दील करता हें

    akraktale के द्वारा
    19/06/2012

    आदरणीय सतीश जी नमस्कार, सहमत हूँ आपसे.पिता का तो नाम ही आपके नाम के आगे जुड़ जाने से आपका वजूद बन जाता है ऐसे कुम्भकार होते हैं पिताजी. आपको काव्य पसंद आया, लिखना सार्थक रहा. धन्यवाद.

RAJEEV KUMAR JHA के द्वारा
19/06/2012

आदरणीय अशोक जी,सादर.पिता के संग बिताए पलों का बहुत सुन्दर वर्णन किया है. घोर अँधेरे में भी बढ़कर उनका दीप जलाना याद रहा, डाट भले सौ खाई फिरभी ज्ञान पिता का याद रहा, खुद पिता बन भूल ना पाया, मान पिता का याद रहा, नित प्रातः स्मरण माता का, सम्मान पिता का याद रहा. बहुत प्रेरणादायी पंक्तियाँ.

    akraktale के द्वारा
    19/06/2012

    आदरणीय राजीव जी नमस्कार, आपको पिता संग बिताये पलों पर लिखी रचना के कुछ अंश अच्छे लगे जानकार प्रसन्नता हुई, मेरा लेखन सफल हुआ. आभार आपका.

19/06/2012

सादर प्रणाम! खुद पिता बन भूल ना पाया, मान पिता का याद रहा, नित प्रातः स्मरण माता का, सम्मान पिता का याद रहा………………….बहुत खूब सर…..!. आपको पढ़कर कभी यह नहीं लगता की आपको पढ़ रहे हैं बल्कि जो विषय-वस्तु आप उठाते हैं वो साक्षात् सजीव रूप धारण कर लेता हैं और सबसे बड़ी बात कि आपकी बात और भाषा कहीं से भी बनावटी नहीं लगती………. यह पल और समय निश्चित ही महान और महत्वपूर्ण है जो मैं आपको पढ़ रहा हूँ…..!

    akraktale के द्वारा
    19/06/2012

    प्रिय अनिल जी नमस्कार, रचना आपके मन को अच्छी लगी जानकार मुझे भी संतोष मिला, आप कटी पतंग की डोर को ना उलझाओ जाने दो मंजिल अभी दूर है यहीं उलझ कर रह जायेगी, फट जायेगी,फटना तो उसको है किन्तु कुछ दुरी तो तय करने दो. आपके असीम स्नेह के लिए ह्रदय से आभारी हूँ.

surendra shukla bhramar5 के द्वारा
18/06/2012

तनय वेदना को पढकर मरहम उनका लाना याद रहा, भूल सका ना परिणामों पर मुस्काना उनका याद रहा, बचपन के लम्हे लम्हे पर साथ पिता का याद रहा, और तरुणाई में भी काँधे पर हाथ पिता का याद रहा. सुन्दर संस्कार देने वाले उन पिता जी को नमन ….पिता का बच्चों को प्यार के साथ अनुशासन में पालना संस्कार देना होश और जोश देना बहुत याद आता है सच में … जय श्री राधे अशोक भाई भ्रमर ५

    akraktale के द्वारा
    19/06/2012

    आदरणीय भ्रमर जी नमस्कार, पिताजी के साथ की यादें भूली नहीं जाती और उनके संस्कार सदैव जीवन में पग पग पर गर्वोन्नत महसूस कराते हैं. आपके स्नेह जो नमन. धन्यवाद.जय श्री राधे!

alkargupta1 के द्वारा
18/06/2012

अशोक जी , पिता के साथ रहने वाली स्मृतियाँ तो सदैव ही हृदय में अंकित रहती हैं उन्हें कदापि भूला ही नहीं जा सकता हैं ……. पिता तो एक ऐसा वृहद् वृक्ष है जिसके तले संतान को हर सुख व ख़ुशी मिलती है बहुत ही सुन्दर मनोभाव…..

    akraktale के द्वारा
    19/06/2012

    अलका जी सादर नमस्कार,सही कहा आपने पिता तो एक ऐसा वृहद् वृक्ष है जिसके तले संतान को हर सुख व ख़ुशी मिलती है. यदि पिता ना हो तो बचपन के बाद सीधे बुढ़ापा ही आता है और बचपन भी बचपन कहाँ रह जाता है. धन्यवाद.

rajanidurgesh के द्वारा
18/06/2012

पिता का याद रहा संस्कारों को खून में प्रवाहित करने का प्रयास पिता का याद रहा, हर मुश्किलों में पिता का सर पे हाथ फिराना याद रहा, हार हो या जीत हो पिता के सहयोग का याद रहा. आपके पंक्तियों में पिता का सवरूप का याद रहा. वाह-वाह क्या लेखनी है सरजी ! डा. रजनी.

    akraktale के द्वारा
    19/06/2012

    रजनी जी सादर नमस्कार, मेरे ब्लॉग पर आपका स्वागत है. आपका रचना को विस्तार देना और सराहना मेरे लिए अवश्य ही प्रेरणादायी होगा. धन्यवाद.

yamunapathak के द्वारा
18/06/2012

नमस्कार सर yah to अत्यंत सुन्दर कविता है क्या मैं इसे अपनी डायरी का हिस्सा बना सकती हूँ? मेरे ब्लॉग पर लिखी आप की kavita की पंक्ति बहुत भावपूर्ण थी. शुक्रिया सर

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    यमुना जी सादर नमस्कार, मेरे मनोभावों के शब्द आपकी डायरी में महक सके तो मुझे बहुत प्रसन्नता होगी. आपके ब्लॉग पर लिखी पंक्तियाँ आपको भली लगी जानकार संतोष मिला क्योंकि वहां पर कई बार देखने पर भी कोई परप्रतिक्रया ना देखकर कुछ निराश था.धन्यवाद.

मनु (tosi) के द्वारा
18/06/2012

आदरणीय अशोक जी , आपके उदगार ,आपके भाव …….. इतने सुंदर भावों के साथ पिरोये  इतने सुंदर शब्द ,,, बेहतरीन … बधाई लीजिये !!! सादर !!!!!!!!!!

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    मनु जी सादर नमस्कार, आपको पिताजी के साथ के पलों के मनोभाव की प्रस्तुति अच्छी लगी. आपका कोटिशः धन्यवाद.

PRADEEP KUSHWAHA के द्वारा
18/06/2012

आदरणीय अशोक जी, सादर अभिवादन बस याद रह जाती है. सुन्दर अभिव्यक्ति. नमन माता पिता को

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    आदरणीय प्रदीप जी नमस्कार, सही कहा आपने यादें मन से नहीं जाती और ऐसी मीठी यादें तो फिर शायद कभी नहीं. धन्यवाद.

Acharya Vijay Gunjan के द्वारा
18/06/2012

पिता के प्रति अपनी श्रद्धा को बखूबी इन काव्यात्मक पंक्तियों के माध्यम से निवेदित किया है आप ने !ए. रक्तले जी सादर बधाई !

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    गुंजन जी सादर नमस्कार, आपको प्रयास पसंद आया. धन्यवाद.

vikramjitsingh के द्वारा
18/06/2012

सच है…../// आदरणीय अशोक जी….सादर….

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    धन्यवाद, विक्रमजीत जी.

चन्दन राय के द्वारा
18/06/2012

अशोक साहब , म्र पिता संग बीत रही, पर पिछला किस्सा याद रहा, साथ बिताये हर पल का इक इक हिस्सा याद रहा. बाजारों में त्योहारों पर जाना संग पिता के याद रहा, पहन नए कपडे कुछ दिन फिर यूँ ही इठलाना याद रहा, शैतानी कर, डरकर पिता से घर में छुप जाना याद रहा, पिता की हर छोटी बात ,मनोभाव का याद रहना , आपके पितृ प्रेम की निष्ठा और अंतहीन स्नेह को दिखलाता है , पिता को समर्पित बेहतरीन कविता , अतुलनीय कविता !

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    आदरणीय चन्दन जी नमस्कार, आपसे तारीफ़ पा कर लिखना सार्थक हुआ. मैंने तो सिर्फ पिताजी के साथ के कुछ पलों और मनोभाव को अपनी रचना में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है. धन्यवाद.

seemakaneal के द्वारा
17/06/2012

आदरणीय aakrtkale.जी सादर अभिवादन बहुत सुन्दर रचना है .हार्दिक बधाई .

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    सीमा जी सादर नमस्कार, आपकी प्रतिक्रया पाकर प्रसन्नता हुई. आपको रचना अच्छी लगी. धन्यवाद.

roshni के द्वारा
17/06/2012

अशोक जी नमस्कार किस किस पंक्ति की तारीफ करू हर एक दिल से जुडी लग रही है … पिता जी की यादें यु तो कभी दिल से जाती नहीं , बस जो चले गए है वो ही वापस नहीं आते … घोर अँधेरे में भी बढ़कर उनका दीप जलाना याद रहा, डाट भले सौ खाई फिरभी ज्ञान पिता का याद रहा, सब कुछ याद रहा .. उनका प्यार उनकी फिकर .. बहुत कुछ है कहने को मगर आपकी कविता खुद ही सब कह गयी .. आभार

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    रोशनी जी सादर नमस्कार, बहुत सुन्दर प्रतिक्रिया. सही है जो लोग चले जाते है वे तो नहीं रहते किन्तु यादें कभी मन से जाती भी नहीं. कहने को बहुत था किन्तु बस संक्षेप में लिखने का प्रयास किया है आपको अच्छा लगा. धन्यवाद.

chaatak के द्वारा
17/06/2012

इन पंक्तियों को पढकर सहज ही आपसे आपके पिता का जुड़ाव समझ में आ जाता है मुझे लगता है हममे से अधिकतम लोग कुछ ऐसा ही महसूस करते हैं| अच्छी पोस्ट पर बधाई!

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    आदरणीय चातक जी सादर, बिलकुल सही कहा आपने हमारी सभी की लगभग यही यादें हैं. पिता का बच्चों से स्नेह एक सा ही रहा है और बच्चों का पिताजी के प्रति लगाव भी वही. धन्यवाद.

vinitashukla के द्वारा
17/06/2012

पिता जी से जुडी सुन्दर स्मृतियों की भावपूर्ण प्रस्तुति. बधाई अशोक जी.

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    विनीताजी सादर नमस्कार, पिताजी के साथ की स्म्रतियां तो भूली ही नहीं जा सकती . आपको प्रस्तुति अच्छी लगी. आपका बड़प्पन है. धन्यवाद.

bharodiya के द्वारा
17/06/2012

अशोक भाई नमस्कार आप के पिताजी को प्रणाम । और आप अपने बच्चों के आदर्ष पिता बने रहे ऐसी शुभ कामना । -ि

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    धन्यवाद., भरोडिया जी भाई आपकी शुभ कामनाओं के लिए.

vikasmehta के द्वारा
17/06/2012

raktale ji pita ji ke samman me bahut sundar prstuti vakai parivar ka koi bhi sadsy ho vah hamare lie bahut hi khas hota hai kyo ki ham unke saath apne jivn ka ek bda samy bitate hain vakai pita mata pita bhai bahan bina is sansar me kooch bhi nhi hai aapki yah prstuti padhkar mujhe bhi apne pita ji ki yad aa gyi

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    विकास जी नमस्कार, आपने सही कहा परिवार का हर सदस्य अनमोल है.मगर आजकल तो उसमे भी तोल मोल है. सुन्दर प्रतिक्रया. धन्यवाद.

Santosh Kumar के द्वारा
17/06/2012

आदरणीय भाई जी ,.सादर नमस्कार सुन्दर यादों की भाव भरी अभिव्यक्ति बहुत अच्छी लगी ,.. दूर गया मै कुछ दिन उनसे संस्कार उन्ही के याद रहा, सारा त्याग परिश्रम उनका हर मुस्कानों में याद रहा,…हार्दिक आभार

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    संतोष भाई जी, धन्यवाद.

अजय कुमार झा के द्वारा
17/06/2012

बहुत ही सुंदर और भावपूर्ण रचना अशोक जी । अदभुत और कमाल

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    अजय जी सादर, सराहना के लिए धन्यवाद. आपकी रचनाओं के लगातार किये जा रहे कमाल के आगे कुछ नहीं है.

Rajkamal Sharma के द्वारा
17/06/2012

पिता संग बिताए हुए अनमोल पलों तथा सीखो कों सांझा करने के लिए दिल से आभार http://krishnabhardwaj.jagranjunction.com/2012/06/17/%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%A4%E0%A4%BE/

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    धन्यवाद राजकमल जी.

minujha के द्वारा
17/06/2012

यादों के पल  चुनकर लाने और हमसे बांटने का शुक्रिया रक्ताले जी

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    मीनू जी सादर, धन्यवाद.

dineshaastik के द्वारा
17/06/2012

पिता के साथ  जुड़ी हुई यादों को कविता में पिरौना बहुत ही सुन्दर बन पड़ा। ये यादें माता पिता को अमर बना देतीं हैं।

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    धन्यवाद दिनेश जी.

jlsingh के द्वारा
17/06/2012

आदरणीय अशोक भाई जी, सादर अभिवादन! साथ ही अपने माता पिता के आशीर्वाद हमारे साथ हमेशा रहे यहे कमाना करता हूँ … याद जो कभी भी भूले नहीं जा सकती … हमें बचपन में ही सिखाया जाता था उठकर अपने माता पिता के पैर छुओ और उनसे आशीर्वाद लो!… आज हर पल उनकी याद सताती तो है … मैं भी सही पिता बन पाऊँ यही आशीर्वाद उनसे चाहता हूँ … आपके माता पिता को भी मेरा वंदन! खुद पिता बन भूल ना पाया, मान पिता का याद रहा, नित प्रातः स्मरण माता का, सम्मान पिता का याद रहा.

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    जवाहर जी भाई नमस्कार, माता पिता से आपका लगाव आपकी रचना से ही ज्ञात होता है,बहुत सुन्दर भाव दिए हैं आपने. अवश्य ही माता पिता का आशीष हमें प्राप्त होते रहना चाहिए. आपकी विनम्रता के लिए आपका आभार. सभी बुजुर्गों के प्रति हमारे मन में विनम्रता का भाव सदैव होना चाहिए. धन्यवाद.

Punita Jain के द्वारा
16/06/2012

आदरणीय अशोक जी , आपने पिता की यादोंको हृदयमें संभाला है , उनके दिए संस्कारों को जीवन में उतार डाला है , आपके इन दोनों गुणों को , आपकी इस कविता ने व्यक्त कर डाला है |

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    पुनीता जी सादर, आपकी काव्यमयी प्रतिक्रया के लिए धन्यवाद.

Rajesh Dubey के द्वारा
16/06/2012

पिता की याद में लिखी गयी कविता मुझे भी पिता की यादें ताजी कर गयी. पिता की छत्रछाया मिलती रहे इससे सुन्दर कुछ हो ही नहीं सकता है.

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    आपकी शुभकामनाओं के लिए धन्यवाद राजेश भाई.

pradeepkumarshukla के द्वारा
16/06/2012

नमस्कार अशोक जी, आपकी कविता सुन्दर लगी | इस विषय पर, जहाँ बहुत कम कवितायेँ हैं, लिखने के लिए बधाई | ‘तनय वेदना को पढकर मरहम उनका लाना याद रहा’ , सुन्दर है | मेरी रचनाओं पर अपने विचार पोस्ट करते रहिएगा |

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    शुक्ला जी नमस्कार, फादर्स डे के अवसर पर पिताजी को समर्पित कई उत्कृष्ट रचनाएं इस मंच पर आप पढ़ पायेंगे. आपकी दोनों ही रचनाएं मैंने पढ़ी हैं.धन्यवाद.

nishamittal के द्वारा
16/06/2012

पिता के प्रति सम्मान को प्रदर्शित करती अच्छी रचना पर बधाई अशोक जी.

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    धन्यवाद निशाजी.

pritish1 के द्वारा
16/06/2012

नमस्ते…. आपके लेख से प्रभावित हूँ मैंने अपनी कहानी ऐसी ये कैसी तमन्ना है…२ प्रकाशित की है आप कहानी के प्रथम भाग से परिचित हैं….. कृपया अपने विचारों से मुझे अपने कहानी के दुसरे भाग से अवगत करायें आपके सुझावों की प्रतीक्षा में…….

    akraktale के द्वारा
    18/06/2012

    प्रीतिश जी, ये प्रतिक्रया है या आपकी मुद्रा?


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