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सम्पूर्ण जाग्रति जरूरी है.

Posted On: 6 Sep, 2011 Others में

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कुछ दिन पहले अधिकतर केंद्रीय मंत्रियों ने अपनी संपत्ति का विवरण पेश किया,
कोई १३ करोड़, कोई ४३ करोड़ और कोई २६३ करोड़ कुछ ही थे जो करोड़ से चंद कदम के फासले पर हैं. मै चाहता था की सिर्फ आज की संपत्ति ये न बताएं बल्कि जनता को फंडा बताएं की किस तरह से इतना रूपया कमाया जाता है.जब ये मंत्री मोहोदय प्रथम बार जनता के बीच से संसद गए थे उस दिन इन की संपत्ति कितनी थी, उसके बाद ब्योरेवार संपत्ति बढ़ने की जानकारी हमारे युवाओं को लगाना चाहिए ताकि आज जल्दी पैसा कमाने के चक्कर में विदेशों की और भागता हमारा युवा यहीं रहकर देश की सेवा करेगा.
एक बार इसका खुलासा एक पूर्व मुख्यमंत्री ने इन्काम टैक्स वालों के द्वारा दबाव देने पर कुछ साल पहले किया था.उससे प्रभावित होकर मेरे एक मित्र की वृद्ध माँ ने उसका पूरा घर गोबर के कंडों से भर दिया था. जब उनको समझाया गया की अम्मा लाखों रुपये गोबर के कंडे बेचकर नहीं कमाए जा सकते तो उनका उत्तर था तो क्या एक महिला झूठ बोलेगी?
फिर दो दिन पहले दिल्ली की विधायिका ने सारे विधायकों के वेतन भत्ते में १००प्रतिशत वृद्धि कर दी. मुझे नहीं याद आता की मेरे ३२ वर्षों के कार्यकाल में मैंने कभी एक मुश्त १०० प्रतिशत वृद्धि पाई हो. अभी छठवें वेतनमान को ही लें जिसको बहूत अच्छा बताया जाता है. इसमे भी सालाना वेतन वृद्धि ३ प्रतिशत है और पदोन्नति पर भी ३ प्रतिशत ही है.
अन्नाजी कहते हैं देश जाग गया है. मुझे लगता है nahiकुम्भाकरनी नींद में सोनेवाला ये देश अभी बिलकुल भी नहीं जागा है.इसने सिर्फ पलकें झपकी और हम समझे की देश जाग गया है. इसे पूर्ण रूप से जाग्रत होना पड़ेगा. उस पांच वर्षों के लिए दी जाने वाली मीठी बोली में जो नींद की गोली है उसको गटक ने से पहले कई बार सोचना होगा. हमारे विभाग में सालाना अपनी संपत्ति की जानकारी देनी होती है लगभग प्रतिवर्ष ही उत्तराधिकारी का नाम जांचने की सलाह दी जाती है.क्या संसद और विधायकों के लिए पांच वर्षों में एक बार भी हमसे इस तरह पूछा जाता है? वोट टु रिजेक्ट के मसले पर कहा जाता है की हमारे यहाँ वोटिंग का प्रतिशत ही ४० के आसपास होता है तो फिर कैसे इसका निर्धारण करें. क्या कभी चुनाव आयोग ने उन लोगों से सरसरी जानकारी भी चाही, जो साठ प्रतिशत हैं, की आपने किस मजबूरीवश अपने मताधिकार का प्रयोग नहीं किया?
जो लोग सरकारी कार्यालयों में कार्य करते हैं वो भलीभांति जानते होंगे की सरकारी कर्ज को वसूलने के लिए सरकार कितनी सख्त शर्तें रखती है ताकि कोई पैसा हजम करने की कोशिश ही न करे इसमे भविष्यनिधि से वसूली का भी प्रावधान होता है. बार बार केजरीवाल को कहा जा रहा है की आपने कर्ज लिया था जो ८० हजार से डेढ़ लाख हो गया है आप उसे चुकाइए. ये कर्ज डेढ़ लाख किसकी गलती से हुआ है?
और अंत में मुझे याद आता है टीवी पर कहा किसी का वो वाक्य “ये भी कोई दूध के दूध के धुले नहीं है” इससे मुझको स्मरण आता है वर्षों पहले रेलवे में कार्यरत हास्य कलाकार कुलकर्णी बंधू का वो हास्य जिसमे पेशी से पहले एक चोर वकील से पूछता है की ” मै कोर्ट में क्या कहूँ” तो वकील कहता है “तू कुछ मत बोलना सब मै संभल लूँगा, सिर्फ हाँ या न करना” कुछ देर बाद चोर कहता है “नहीं जमेगा वकील साहब” वकील रौब से कहता है “मै वकील हूँ या तू,पूछ कुछ भी मै हाँ ना में जवाब दूंगा” और चोर पूछता है “वकील साहब आपने चोरी करना छोड़ दिया क्या?”

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16 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pramod chaubey के द्वारा
12/09/2011

आपका लेख महज सैद्धान्तिक नहीं है। व्यावहारिकता से जुड़ा है। मुझे लगता है, जागृति से बड़े बदलाव की स्थित 2047 तक संभव लगती है।  

    akraktale के द्वारा
    13/09/2011

    प्रमोदजी धन्यवाद.  देर से सही किन्तु जनहित का ये बदलाव आया तो यकीनन हमारी आने वाली हमें शुक्रिया जरुर करेगी.

Santosh Kumar के द्वारा
08/09/2011

आदरणीय अशोक जी ,..बहुत विचारणीय पोस्ट ,..अभी कोई नहीं जागा है ,..नींद बहुत गहरी है ,..हमें लगातार सोते रहने के लिए दवाई दी गयी है ,..आपका कटाक्ष अतुल्य है ,..साधुवाद

    akraktale के द्वारा
    13/09/2011

    संतोषजी आपकी सहमति के लिये धन्यवाद.

manoranjanthakur के द्वारा
07/09/2011

अंतिम पंक्ति बहुत ही सही कटाछ

    akraktale के द्वारा
    07/09/2011

    मनोरंजनजी नमस्कार! सराहना के लिये धन्यवाद.

alkargupta1 के द्वारा
06/09/2011

सही तथ्यों के आधार पर यथार्थपरक आलेख है आपका निस्संदेह विचारणीय है !

    akraktale के द्वारा
    07/09/2011

    अलकाजी प्रणाम. सहमतिप्रद  विचारों के लिये धन्यवाद.

sumandubey के द्वारा
06/09/2011

  बहुत ही अछ्छा लेख जो समाज की सच्चाई को दर्शाता है। सच में उन नेताओं से ये राज सभी को जानने का हक है कि इतनी जल्द फर्श से अर्श पर कैसे पहुँचा जाता है।

    akraktale के द्वारा
    07/09/2011

    सुमनजी धन्यवाद. जनता कामयाब हुई तो ये सच्चाई भी जल्दी ही सामने आयेगी.

abodhbaalak के द्वारा
06/09/2011

श्रीमान जी आपकी बात से ऑयर लेख से पूरी तरह सहमत हूँ ज्ञानवर्धक और सोचने पर विवश करता … http://abodhbaalak.jagranjunction.com/

    akraktale के द्वारा
    06/09/2011

    अबोधजी धन्यवाद! आपकी सहमति से मैं समझ सकता हूं कि इन सत्ता लोलुपों ने देश और समाज के उच्च से लेकर अंतिम श्रेणी के व्यक्ति को कितना ठगा है.

vikaskumar के द्वारा
06/09/2011

आप से मै बिलकुल सहमत हु , मंत्रियों ने जो सम्पत्ति का ब्यौरा दिया वह  पूर्ण नहीं है  उन्हें  जनता को अलग- अलग तरह के आय के साधन को भी बताना पड़ेगा.

    akraktale के द्वारा
    06/09/2011

    हाँ, यही मैं चाहता हूं.जैसे कर्मचारी-अधिकारी पर आय से अधिक संपत्ति  का मामला बनता है.उसी तरह इन पर भी राजनितिक जीवन के पूर्व व आज की संपत्ति के अनुसार गैर समानुपातिक संपत्ति का मामला बने. समर्थन के लिये विकासजी आपका शुक्रिया.

nishamittal के द्वारा
06/09/2011

कुम्भ्करनी निंद्रा एक बार थोड़ी चेतनता तो लाई है,परन्तु इसके लिए निरंतर प्रयासरत रहने की आवश्यकता है.

    akraktale के द्वारा
    06/09/2011

    निशाजी धन्यवाद! इसीलिये मेरा कहना है पूर्ण जाग्रति लाओ वरना तो हमारे यहां चलन है “अच्छा, आप जाग गये क्या,अब हम थोडी देर सो लेते हैं.”


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