badalte rishte

Just another weblog

64 Posts

4839 comments

Reader Blogs are not moderated, Jagran is not responsible for the views, opinions and content posted by the readers.
blogid : 5350 postid : 32

हमें आईना न दिखाओ!

Posted On: 28 Aug, 2011 Others में

  • SocialTwist Tell-a-Friend

एक सीधी सी बात थी की आप देश से भ्रष्टाचार मिटाना चाहते हो या नहीं? सरे देश की जनता ने तो खुलकर कहा, हाँ हम देश से भ्रष्टाचार पूरी तरह से मिटाना चाहते हैं.मगर न जाने इन सांसदों को ये बात क्यों नागवार गुजारी. साफ न करके न तो ये जनता से बैर ले सकते थे न ही अपनी करनी पे बैठ के रो सकते थे. नित नए बहाने बनाने लगे, सुन कर आश्चर्य होता था और गुस्सा तो न पूछो.
क्यों इन सांसदों को बार बार ये कहना पड़ रहा था की हमारा सम्मान करो?और किससे? उस जनता से जिसने तुमको देश के सर्वोच्च मंदिर में भेजा है अपने हितों की रक्षा के लिए. संसद का किसी ने अपमान नहीं किया. किसी ने संविधान के विरुध्द जाने की बात नहीं की.
दरअसल जनता ने इन्हें आइना दिखा दिया और उसको देखकर ये डरने लगे थे,ये खुद की शक्लें नहीं पहचान पा रहे थे.बारह दिन लग गए तब जा कर इनको विश्वास हुआ की ये हमारा ही चेहरा है. कितनी बार मल मल कर धोया होगा इन्होने अपने चहरे को? फिरभी कई सांसद अपने चहरे पहचान नहीं पा रहे हैं.
आखिर मान ही गए.देश में हुए एतिहासिक आन्दोलन के आगे, सत्य के आगे आखिर झुकना ही पड़ा.मै तो निराश हो गया था. मगर अन्ना को हौसला देखकर लगता है की हाँ वो एक वीर सिपाही हैं देश के . देश हमारा भी है देश तुम्हारा भी है तुम हमेशा जीवित नहीं रहोगे. भ्रष्टाचार नहीं रोकोगे तो तुम न सही तुम्हारी अगली पीढ़ी उसको भोगेगी. सांसद इस बात को समझेंगे यही आशा है.

Rate this Article:

1 Star2 Stars3 Stars4 Stars5 Stars (2 votes, average: 4.00 out of 5)
Loading ... Loading ...

14 प्रतिक्रिया

  • SocialTwist Tell-a-Friend

Post a Comment

CAPTCHA Image
*

Reset

नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

pramod chaubey के द्वारा
12/09/2011

आदरणीय अशोक जी. प्रणाम सांसद मजे(खिलाड़ी) हैं। उनके कर्मो के बारे में जनता जानती है। अशोक जी।  एक कहानी याद आ गयी। इस कहानी को सांसदों से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए, क्योंकि उनके मान-अपमान छुई-मुई की तरह हो गयी है। मठाधीश के नहीं रहने पर कई शिष्यों में एक मठाधीश बनता है तो दूसरे को पीड़ा होती है।  मठाधीश नहीं बनने पर शिष्य( पुराने ) गुरू से मिलकर कहता है कि गुरू जी  जो मठाधीश बना है, वह ठीक नहीं है। गुरू जी ने चेले से कहा कि  इस जन्म  में जो मठाधीश होता है, वह अगले जन्म में कुत्ता बनता है। गुरू जी का जबाब  सुनकर शिष्य संतुष्ट हो जाता है और चला जाता है। लेखों से तो लगता है कि  आप समाज की पीड़ा से अत्यंत द्रवित हैं, जिसे हम वाजिब कह सकते हैं पर  इस प्रतिक्रिया के बाद भी आप न मुस्करा सके तो मेरी प्रतिक्रिया अधूरी होगी। आपकी प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा में आपका स्नेही..प्रमोद.

    akraktale के द्वारा
    13/09/2011

    प्रमोदजी बहूत खूब बढिया तर्क. इस जनम तो मैने मठाधीश नहीं बनना है पर क्या पिछले जनम के प्रयश्चित का कोई तरीका है. एक बार फिर प्रमोदजी शुक्रिया.

    pramod chaubey के द्वारा
    15/09/2011

    श्रद्धेय श्री अशोक जी,  सादर प्रणाम प्रायश्चित जैसे ही मन में आ जाय, वैसे ही प्रायश्चित प्रारंभ हो जाता है।  हम तो(प्रायः हर कोई) इस जन्म में तो सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं।  पिछले जन्म के कर्मो से उपजी स्थितियों पर प्रायश्चित जैसी बातें मन में हैं, तो निश्चित तौर पर आप के पिछले जन्म के कर्म अच्छे थे,  जिसके कारण आपका का मन प्रायश्चित की ओर जा रहा है।  सत्यवादी राजा हरिश्चद्र की स्थितियों से हम सभी वाकिफ हैं।  मुझे लगता है कि अशोक जी हम या आप अभी वैसी स्थितियों  से नहीं गुजर हैं। भगवान राम का चौदह वर्ष का वनवास क्या  कम था। हम पर, आप पर ईश्वर की विशेष कृपा है कि जो  अन्य की अपेक्षा कृत(हमसे या आपसे नीचे की स्थिति में हैं) हम या आप बेहतर स्थिति में स्थिति में हैं।    अगली पंक्ति आपके मुस्कराने के लिए… फिर से आप पिछले जन्म के पिछले जन्म से जुड़े सवाल न  पूछ लीजियेगा। आप मुझपर अपना आशीर्वाद बनाये ऱखियेगा। 

    akraktale के द्वारा
    26/09/2011

    प्रमोदजी नमस्कार,   पूछने बताने का सिलसिला तो चलता ही रहेगा.महत्व की बात ये है कि आपसी स्नेह बना रहे.धन्यवाद. कुछ देरी से इधर आया क्षमा करें.

Santosh Kumar के द्वारा
29/08/2011

श्री अशोक जी ,.सादर नमस्कार ,. बेबाक पोस्ट ,..क्या अब हमारे नेता कुछ सीखने का प्रयत्न करेंगे ,…आभार http://santo1979.jagranjunction.com/

    akraktale के द्वारा
    29/08/2011

     संतोषजी नहीं अभी नहीं, गरदन पर छुरा रखा हो तो आप कुछ भी बुलवा लो. सुधरेंगे तो  ये तब,जब इनके सर पे सवार होकर वसीयत पर हस्ताक्षर करवा लेंगे.

nishamittal के द्वारा
28/08/2011

मान्यवर यदि इनमें इतनी नैतिकता होती तो देश की तस्बीर कुछ और होती अशोक जी.

    akraktale के द्वारा
    29/08/2011

    सत्य कहा निशाजी आपने, अब हम यह मान ले की जन जागॄति आ रही है.मैं भी अन्ना तु भी अन्ना, यदि हर गांव मे एक भी अन्ना तैयार हो गया तो वो दिन दूर नहीं जब ये सारे बहूरुपिये अपने घरों में होंगे.

ajaysingh के द्वारा
28/08/2011

नमस्कार भाई साहब,   आपने बिना लाग-लपेट के एक दम सच्ची बात कही….    कुछ सासंदो ने को खुद को 12 दिनों मे पहचानने की कोशिश की भी लेकिन फिर भी कई सांसद अपने चहरे अभी भी पहचान नहीं पा रहे हैं। जब भी ये बेचारे अपने चेहरो को धुलते हैं इनके हाथों की गन्दगी फिर इनके चेहरे गन्दे कर दाती है. संसद मे बैठे कुछ जोकरों से भौड़े मजाक से ज्यादा की उम्मीद ही नही करनी चाहिये। धन्यवाद. (आपका शुभ नाम नही समझ पा रहा हूँ, कृपया अवगत कराए.)

    akraktale के द्वारा
    28/08/2011

    अजयजी  आपको अशोक रक्ताले का महाकाल की नगरी उज्जैन से नमस्कार! इस जनक्रांति के बाद सांसदो को अपने व्यवहार और चरित्र में  परिवर्तन लाना ही होगा वरना संसद भी उन्हे पहचान नहीं पायेगी. 

abodhbaalak के द्वारा
28/08/2011

शुभकामनाएं, आशा है की हमें एक भस्र्श्ताचार मुक्त भारत अब मिलेगा … http://abodhbaalak.jagranjunction.com

    akraktale के द्वारा
    28/08/2011

     अबोधजी  अवश्य ही हम भर्ष्टाचार मुक्त भारत में होंगे. आज हमने जन और जनतंत्र की ताकत को पहचाना है. अब आवश्यकता हम में जीवटता की है.

manoranjanthakur के द्वारा
28/08/2011

गलती तो किसी न किसी को भोगना ही है

    akraktale के द्वारा
    28/08/2011

    मनोरंजनजी धन्यवाद!  इसीलिए गलती सुधार लेने में ही सबकी भलाई है.


topic of the week



latest from jagran